येदियुरप्पा के खिलाफ मुकदमा दाखिल, भाजपा-कांग्रेस में जंग तेज (राउंडअप)
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जहां मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए राज्यपाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है वहीं कांग्रेस ने राज्यपाल के फैसले का बचाव किया है।
राज्यपाल भारद्वाज ने मुख्यमंत्री पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर उनके खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति शुक्रवार रात दी। इसके बाद दो वकीलों ने शनिवार को बेंगलुरू की एक अदालत में येदियुरप्पा के खिलाफ दो शिकायतें दाखिल कीं।
वकील सिराजिन बाशा और के.एन. बलराज ने अपनी शिकायतों में अन्य लोगों सहित येदियुरप्पा, उनके दो पुत्र और दामाद को नामजद किया है। शिकायतों में अदालत से संज्ञान लेते हुए इन सभी को सुनवाई के लिए बुलाने का अनुरोध किया गया है।
मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के एक पुत्र बी.वाई. राघवेंद्र भाजपा के लोकसभा सदस्य हैं।
दोनों वकीलों ने अदालत परिसर के बाहर पत्रकारों को बताया कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सी. हिप्पारगी इस मामले की सुनवाई 24 जनवरी को करेंगे। इसी दिन और शिकायतें दाखिल की जाएंगी।
मुख्यमंत्री पर अभियोग चलाने की मंजूरी दिए जाने पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने राज्यपाल भारद्वाज को 'राजनीतिक एजेंडे के तहत राज्य सरकार को अस्थिर करने के लिए केंद्र का एक प्रतिनिधि' करार दिया।
भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने पत्रकारों को बताया, "लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित येदियुरप्पा को अपने पद पर बने रहने का पूरा अधिकार है।"
रूडी ने कहा, "कर्नाटक की जनता के अधिकारों और उनकी आकांक्षाओं को केंद्र का एक प्रतिनिधि कुचल नहीं सकता।"
वरिष्ठ नेता व पार्टी के कर्नाटक मामलों के प्रभारी अरुण जेटली ने राज्यपाल के इस फैसले को राजनीति से प्रेरित और प्रदेश सरकारों की स्थिरता के लिए खतरनाक कदम बताया है।
जेटली ने कहा कि राज्यपाल ने दो वकीलों द्वारा की गई शिकायत पर मंत्रिपरिषद की सलाह नहीं ली जबकि सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश के मुताबिक मुख्यमंत्री पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने से पहले इस प्रक्रिया को अपनाया जाना चाहिए।
जेटली ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राजनेताओं को राज्यपाल नियुक्त करने की परम्परा बनी है। ऐसे में यदि राज्यपाल जांच पूरी होने से पहले और न्यायिक संस्था के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति देते हैं तो केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों को अस्थिर करना आसान हो जाएगा।
उधर बेंगलुरू में येदियुरप्पा ने जोर देकर कहा कि उन्हें पद छोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है। वह अंत तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे और साबित करेंगे कि वह बेदाग हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने राज्यपाल भारद्वाज के उस कदम का समर्थन किया जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी।
चिदम्बरम ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा कि कर्नाटक में जारी राजनीतिक गतिविधियों को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संज्ञान में लिया है। उन्होंने कहा कि किसी राज्यपाल द्वारा किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देना कोई अभूतपूर्व घटना नहीं है।
चिदम्बरम ने कहा, "यह पहला मौका नहीं है जब एक राज्यपाल ने मुख्यमंत्री या मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी है। इस सम्बंध में जो नियम हैं वह पूरी तरह स्पष्ट हैं।"
केंद्रीय कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने कहा कि येदियुरप्पा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के मामले एकदम स्पष्ट हैं और राज्यपाल ने अपने अधिकार क्षेत्र में रहते हुए मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला चलाने की मंजूरी दी है।
उन्होंने कहा, "कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और मुख्यमंत्रियों को कानून में कोई छूट नहीं है।"
मोइली ने कहा, "इस मामले में राज्यपाल फैसला नहीं करेंगे। मूल तौर पर यह अदालती मामला है और राज्यपाल के पास मुख्यमंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरी देने का अधिकार है।"
मुख्यमंत्री के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराए जाने से नाराज सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं ने शनिवार को बंद का आह्वान किया। राज्यपाल के निर्णय के विरोध में उन्होंने कई बसों को आग के हवाले किया और कई स्थानों पर दुकानों पर पत्थर फेंके। इससे राज्य में जनजीवन प्रभावित हुआ।
कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को देखते हुए स्कूल और कॉलेजों को बंद रखा गया जबकि बेंगलुरू के बस और रेलवे स्टेशनों पर सैकड़ों की संख्या में यात्री फंस गए। भाजपा सदस्यों ने राज्य के बड़े कस्बों में रैली निकाली।
राज्यपाल की मंजूरी और शिकायतों को चुनौती देने के लिए येदियुरप्पा सोमवार को उच्च न्यायालय की शरण में जा सकते हैं।
येदियुरप्पा ने कहा, "मैं अपने विधि विशेषज्ञों और पार्टी के नेताओं से सलाह ले रहा हूं। मेरे ऊपर जो आरोप लगे हैं उनसे कानूनी और राजनीतिक तरीके से लड़ने के लिए मैं आवश्यक कदम उठाऊंगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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