भारद्वाज के फैसले पर सियासत गरमाई (लीड-2)

मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा दायर कराने वाले वकीलों सिराजिन बाशा और के.एन. बलराज ने बेंगलुरू में पत्रकारों को बताया, "अभी हमने दो शिकायतें दाखिल की हैं।"

उन्होंने कहा, "हम तीन मामलों में कुल छह शिकायतें दाखिल करा सकते हैं। शेष शिकायतों को हम सोमवार को दाखिल कराएंगे।"

ज्ञात हो कि गत 28 दिसम्बर को वकीलों ने राज्यपाल को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे येदियुरप्पा के खिलाफ आपराधिक अभियोग चलाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

येदियुरप्पा और उनके दो पुत्रों बी.वाई. राघवेंद्र और बी.वाई. विजयेंद्र के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। बी.वाई. राघवेंद्र भाजपा के लोकसभा सदस्य हैं।

वकीलों ने बताया कि शिकायतें भ्रष्टाचार निरोधक कानून और अपराध प्रक्रिया संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत दाखिल कराई गई हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने राज्यपाल भारद्वाज के उस कदम का समर्थन किया जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी।

चिदम्बरम ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा कि कर्नाटक में जारी राजनीतिक गतिविधियों को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संज्ञान में लिया है। उन्होंने कहा कि किसी राज्यपाल द्वारा किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देना कोई अभूतपूर्व घटना नहीं है।

चिदम्बरम ने कहा, "यह पहला मौका नहीं है जब एक राज्यपाल ने मुख्यमंत्री या मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी है। इस सम्बंध में जो नियम हैं वह पूरी तरह स्पष्ट हैं।"

केंद्रीय कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने कहा कि येदियुरप्पा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के मामले एकदम स्पष्ट हैं और राज्यपाल ने अपने अधिकार क्षेत्र में रहते हुए मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज करने की मंजूरी दी है।

उन्होंने कहा, "कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और मुख्यमंत्रियों को कानून में कोई छूट नहीं है।"

मोइली ने कहा, "इस मामले में राज्यपाल फैसला नहीं करेंगे। मूल तौर पर यह अदालती मामला है और राज्यपाल के पास मुख्यमंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरी देने का अधिकार है।"

कांग्रेस ने कहा है कि कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देकर अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वाह किया है। उनके मुताबिक यदि उनके फैसले से कोई आहत है तो उसके पास कानूनी रास्ता अख्तियार करने का विकल्प है।

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने शनिवार को पत्रकारों से चर्चा में कहा, "राज्यपाल का पद संवैधानिक है। संविधान के तहत ऐसे मामलों में फैसले लेने का उनका विशेषाधिकार है। पिछले कुछ महीनों से वह अपने इसी विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। यदि कोई आहत है तो उनके पास कानूनी विकल्प खुले हैं।"

उन्होंने कहा, "भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में नहीं पड़ना चाहिए। यह इसका समाधान भी नहीं है।"

जबकि राज्यपाल के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आपत्ति जताई। वरिष्ठ नेता व पार्टी के कर्नाटक मामलों के प्रभारी अरुण जेटली ने राज्यपाल के इस फैसले को राजनीति से प्रेरित और प्रदेश सरकारों की स्थिरता के लिए खतरनाक कदम बताया है।

जेटली ने कहा कि राज्यपाल ने दो वकीलों द्वारा की गई शिकायत पर मंत्रिपरिषद की सलाह नहीं ली जबकि सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश के मुताबिक मुख्यमंत्री पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने से पहले इस प्रक्रिया को अपनाया जाना चाहिए।

जेटली ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राजनेताओं को राज्यपाल नियुक्त करने की परम्परा बनी है। ऐसे में यदि राज्यपाल जांच पूरी होने से पहले और न्यायिक संस्था के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति देते हैं तो केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों को अस्थिर करना आसान हो जाएगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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