शिवराज की कितनी सुनते हैं उनके मंत्री!
भोपाल, 22 जनवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों को कितनी गंभीरता से लिया इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शीतलहर से फसल को हुए नुकसान का जायजा लेने के मुख्यमंत्री के निर्देश के 10 दिन बीत जाने के बावजूद आलम यह है कि प्रदेश के 50 में से 25 जिलों तक प्रभारी मंत्री पहुंचे ही नहीं।
प्रदेश में शीतलहर के कारण फसल को भारी क्षति हुई है। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक प्रदेश में 3,500 करोड़ रुपये मूल्य की फसल बर्बाद हुई है। मुख्यमंत्री चौहान ने 11 जनवरी को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सभी मंत्रियों को निर्देश दिए थे कि वे अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर हालात का जायजा लें।
चौहान के निर्देशों के 10 दिन बाद यानी 21 जनवरी तक आलम यह है कि प्रदेश के 50 में से 25 जिलों तक प्रभारी मंत्री नहीं पहुंचे। इन 25 जिलों में रायसेन, पन्ना, उज्जैन, मंदसौर, सागर, राजगढ़, टीकमगढ़, विदिशा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, कटनी, उमरिया, गुना, अशोकनगर एवं जबलपुर शामिल हैं। इन जिलों में पाला व तुषार ने फसल पर कहर ढाया है।
सरकार के कई मंत्रियों ने अपने प्रभार वाले जिले में जाना उचित नहीं समझा है, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो दो में से कम से कम एक जिले में पहुंचे हैं।
सागर जिले की भाजपाध्यक्ष सुधा जैन से प्रभारी मंत्री के दौरे के बारे में जब पूछा गया तो उन्होंने इसका सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि जिले के प्रभारी मंत्री जिला योजना समिति की बैठक में तो शामिल हुए थे लेकिन 21 जनवरी को उनकी बेटी की शादी थी इसलिए वह अभी तक दौरे पर नहीं आ सके हैं, जो कि स्वाभाविक है।
वहीं टीकमगढ़ के जिलाध्यक्ष नंदकिशोर नापित ने आईएएनएस से कहा कि प्रभारी मंत्री 11 जनवरी के बाद से नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने तो अपना अलग ही दुखड़ा रोया। उन्होंने कहा कि प्रभारी मंत्री और जिलाधिकारी आपस में ही दौरा तय कर लेते हैं और उन्हें जानकारी तक नहीं देते।
उमरिया के भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश शर्मा ने कहा कि प्रभारी मंत्री 11 तारीख से पहले योजना समिति की बैठक हुई थी और वह क्षेत्र का एक दिन के दौरे पर आए थे। आगे के दौरे के सम्बंध में वह खुद मंत्री से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनसे उनका संपर्क स्थापित नहीं हो पा रहा है।
ज्ञात हो कि प्रदेश में फसल चौपट होने व कर्ज के दबाव के चलते अब तक आठ किसान आत्महत्या कर चुके हैं, वहीं छह ने आत्महत्या की कोशिश की है। हताश किसान सरकार की ओर से मदद का इंतजार कर रहे हैं।
मंत्रियों का बचाव करते हुए सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा ने आईएएनएस से कहा, "अधिकांश मंत्री उन जिलों तक पहुंच चुके हैं जहां पाला से फसल को नुकसान हुआ है। कुछ नहीं पहुंचे होंगे तो इसके पीछे उनकी निजी व्यस्तता हो सकती है।"
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री खुद चार जिलों में फसल की बर्बादी का जायजा ले चुके हैं। उन्होंने किसानों को राहत देने के मकसद से लगान माफी, एक प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज, एक साल का ब्याज माफ करने के अलावा कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। साथ ही वह केंद्र सरकार से विशेष पैकेज की गुहार भी लगा चुके हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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