रॉ की पूर्व अधिकारी ने न्यायालय में कपड़े उतारे (लीड-1)
नई दिल्ली, 20 जनवरी (आईएएनएस)। मानव तस्करी के मामले में सुनवाई के दौरान गुरुवार को रिसर्च एण्ड एनालिसिस विंग (रॉ) की एक पूर्व अधिकारी ने दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के समक्ष अपने कपड़े उतारने की कोशिश की। न्यायालय ने उसकी मानसिक दशा की जांच कराने का आदेश दिया है।
न्यायाधीश अजित भरिहोक के न्यायालय के समक्ष निशा भाटिया (45) को सुबह 10.45 बजे पेश किया गया। न्यायाधीश के समक्ष पेश होने के बाद उसने अपना ऊपरी हिस्से का कपड़ा उतार दिया। बाद में महिला हवलदारों ने उसे रोका।
भोजनावकाश के बाद जब मामले की सुनवाई शुरू हुई तो कुछ मिनट बाद भाटिया दोबारा कपड़े उतारने लगी। इस बार उसने अभी अपना जैकेट उतारा था तभी महिला हवलदारों ने उसे रोक लिया।
इसके बाद मामले की सुनवाई भाटिया के वकील रीता कौल की उपस्थिति में हुई।
न्यायाधीश भरिहोक ने उसकी इस हरकत पर टिप्पणी करते हुए कहा, "याचिकाकर्ता द्वारा न्यायालय में अपने कपड़े उतारने का व्यवहार अशोभनीय है और इससे पता चलता है कि याचिकाकर्ता की मनोदशा ठीक नहीं है। ऐसा एक सामान्य व्यक्ति से अपेक्षित नहीं है।"
न्यायालय ने भाटिया की मानसिक दशा की जांच कराने का निर्देश दिया। न्यायालय ने उसे दिलशाद गार्डन स्थित 'इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन विहैवियर एंड एलायड साइंसेज' के चिकित्सा अधीक्षक के समक्ष पेश करने के लिए आदेश दिया। न्यायालय ने इस सम्बंध में 20 फरवरी को रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।
भाटिया ने हालांकि दावा किया कि उसके वरिष्ठ अधिकारियों ने उसके खिलाफ झूठे आरोप और अभियोग लगाए हैं, क्योंकि उसने अगस्त 2008 में उनके खिलाफ अपना यौन उत्पीड़न करने की शिकायत दर्ज कराई है।
मामले के एक आरोपी अशोक चतुर्वेदी निचले न्यायालय द्वारा दोषी करार दिया चुका है लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसे रिहा कर दिया। इसके बाद भाटिया ने उसके खिलाफ याचिका दायर की।
उल्लेखनीय है कि भाटिया गुड़गांव स्थित रॉ प्रशिक्षण संस्थान में तैनात थी। उसके यौन उत्पीड़न की शिकायतों को कथित रूप से नजरअंदाज किए जाने पर उसने 19 अगस्त 2008 को प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष आत्महत्या करने का प्रयास किया। इसके बाद उसे नौकरी से निलंबित कर दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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