ग्राहम स्टेंस के हत्यारों की सजा बरकरार
नई दिल्ली। आस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दोनों पुत्रों को उड़ीसा में हिंदू उन्मादियों की भीड़ द्वारा जलाकर मार डालने के ठीक 12 साल बाद शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय ने भीड़ की अगुवाई करने के जुर्म में दारा सिंह और उसके साथी महेंद्र हम्बराम की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।
न्यायालय ने कहा कि उनका जुर्म मौत की सजा के लिए 'जघन्यतम अपराध' की श्रेणी में नहीं आता।
उम्रकैद की सजा की पुष्टि करते हुए न्यायमूर्ति पी. सतशिवम और न्यायमूर्ति बी.एस. चव्हाण की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा, "यह जुर्म जघन्यतम अपराध की श्रेणी में आता है कि नहीं इसकी जांच प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के संदर्भ में रखकर की जानी है।"
खंडपीठ की ओर से न्यायमूर्ति सतशिवम ने कहा, "किसी भी आरोपी के खिलाफ साजिश का आरोप साबित करने के लिए तथ्य नहीं है।" उन्होंने कहा, "इस मामले में उच्च न्यायालय से सहमत होते हुए हम उसके फैसले की पुष्टि और सजा को बरकरार रखते हैं।"
न्यायमूर्ति ने कहा, "इस मामले में यद्यपि ग्राहम स्टेंस और उनकी दो नाबालिग बच्चों को मनोहरपुर में एक स्टेशन वैगन में सोते समय जलाकर मार दिया गया, इस हत्या का उद्देश्य स्टेंस को उसकी धार्मिक गतिविधियों खासकर गरीब जनजातीय लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए सबक सिखाना था।"
फैसले में महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा गया, "यह अविवादित है कि 'बल के प्रयोग', उकसाकर, प्रलोभन देकर अथवा एक धर्म को दूसरे धर्म से अच्छा बताकर किसी के विश्वासों में हस्तक्षेप करना किसी के लिए न्यायोचित नहीं है।"
फैसले में कहा गया, "इन सभी पहलुओं पर उड़ीसा उच्च न्यायालय द्वारा सत्यता से विचार किया गया और दारा सिंह को मिली मौत की सजा को आजीवन करावास में बदला गया। उच्च न्यायालय के इस फैसले से हम सहमत हैं।"
उल्लेखनीय है कि ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दोनों पुत्रों फिलिप (10) और टिमोथी (6)की उड़ीसा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में 22 जनवरी 1999 में निमर्म हत्या कर दी गई थी। घटना के समय वे तीनों अपनी स्टेशन वैगन में सो रहे थे।
सीबीआई की विशेष अदालत ने सितम्बर 2003 में दारा सिंह को सजा-ए-मौत सुनाई थी जबकि उसके 12 साथियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मई 2005 में उड़ीसा उच्च न्यायालय ने दारा सिंह की मौत की सजा कम करते हुए उसे उम्रकैद में बदल दिया था। हम्बराम को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई जबकि 11 अन्य को बरी कर दिया गया।
कटक-भुवनेश्वर के आर्कबिशप रॉफेल चीनाथ ने कहा कि ईसाई समुदाय को सर्वोच्च न्यायालय का फैसला मंजूर है लेकिन ईसाई समुदाय पहले ही दोषी को माफ कर चुका है। उन्होंने कहा, "जहां तक ईसाई समुदाय का सवाल है हम पहले ही दारा सिंह को माफ कर चुके हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने जो उम्रकैद की सजा सुनाई है, वह हमें मंजूर है।"
बेंगलुरू की ग्लोबल काउंसिल ऑफ इंडियन क्रिश्चियंस के अध्यक्ष साजन के जार्ज ने कहा, "हम सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की सराहना करते हैं।" हिंदू नेताओं ने भी न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक सुभाष चौहान ने कहा, "जनता का न्यायपालिका में यकीन है। हम सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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