सुकना भूमि घोटाले में लेफ्टिनेंट जनरल रथ दोषी करार (लीड-1)
सेवारत जनरलों में सबसे वरिष्ठ माने जाने वाले रथ अनुशासनहीनता के मामले में फंसे हैं। उन्हें अब से कुछ दिन के भीतर सजा सुनाई जाने की संभावना है।
रथ पर आरोप था कि उन्होंने सेना के साथ छल करने के इरादे से 2008 में सैन्य छावनी के निकटवर्ती 70 एकड़ के भूखंड पर शैक्षिक संस्थान के निर्माण के लिए एक निजी कम्पनी को अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया था।
इसी मामले में एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश को भी जल्द ही कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ सकता है। प्रकाश उन दिनों सैन्य सचिव थे, जब जनरल दीपक कपूर सेना प्रमुख थे। कपूर ने प्रकाश के कोर्ट मार्शल का आदेश अपनी सेवानिवृत्ति से पहले मार्च 2010 में दिया था।
कोर्ट मार्शल के लिए लेफ्टिनेंट जनरल आई.पी. सिंह की अध्यक्षता में गठित पांच लेफ्टिनेंट जनरलों की समिति ने रथ को तीन अभियोगों में दोषी पाया।
रथ पर लगे आरोपों में सेना के साथ छल करने के इरादे से गलत तरीके से और सम्बंधित अधिकारी की सहमति के बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करना, सुरक्षा दृष्टि से जांच के बिना सैन्य शैक्षिक संस्थान की स्थापना की अनुमति देना, निजी कम्पनी से इस आशय के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए बिना निर्माण की अनुमति देना कि शैक्षिक संस्थान में सैन्य अधिकारियों का कोटा रहेगा तथा भूमि हस्तांतरण के बारे में उच्चाधिकारियों को सूचना नहीं देना शामिल है।
ज्ञात हो कि सैन्य अधिनियम की धारा 52 के तहत धोखाधड़ी के आरोपी को अधिकतम 10 साल कैद की सजा का प्रावधान है।
इस मामले की आठ महीने लंबी चली सुनवाई के बाद सैन्य अदालत ने यह फैसला सुनाया।
जांच रिपोर्ट आने के बाद जनरल कपूर ने 2010 की शुरुआत में सजा के तौर पर अधिकारियों पर मामूली प्रशासनिक कार्रवाई करने का आदेश दिया था, जिसे रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने नामंजूर कर दिया था।
इसके बाद कपूर ने रथ और अवधेश प्रकाश के खिलाफ कोर्ट मार्शल का आदेश दिया था। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने उप सेना प्रमुख के पद पर रथ की नियुक्ति रोक दी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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