आरुषि हत्याकांड : तलवार को दस्तावेज न देने का आदेश (लीड-1)
अदालत ने यह कदम सीबीआई द्वारा तलवार को 'संदिग्ध अभियुक्त' बताने के बाद उठाया। इस मामले की सुनवाई अब 25 जनवरी को होगी।
सीबीआई के वकील के दलील स्वीकार करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि तलवार को पहले ही अंतिम (क्लोजर)रिपोर्ट दी जा चुकी है और चूंकि वह आरुषि की हत्या में 'संदेह के घेरे से बाहर नहीं' हैं, इसलिए हत्याकांड से जुड़े अन्य दस्तावेज उन्हें नहीं दिए जा सकते।
अदालत ने इसके बाद सुनवाई 25 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी।
ज्ञात हो कि इसके पहले सीबीआई ने दिन में अदालत से कहा कि तलवार मामले में 'संदिग्ध अभियुक्त' हैं, इसलिए वह उन्हें आरुषि हत्याकांड से जुड़े दस्तावेज देने के खिलाफ है।
गाजियाबाद में सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने दलील दी कि आरुषि हत्याकांड मामले में तलवार वादी नहीं, बल्कि 'संदिग्ध अभियुक्त' हैं और इसलिए वह मामले से जुड़े दस्तावेज पाने के हकदार नहीं हैं।
इस पर तलवार के वकील सतीश टमटा ने दलील दी कि यदि तलवार संदिग्ध अभियुक्त हैं तो उनके खिलाफ आरोप पत्र क्यों नहीं दायर किया गया। उन्होंने अदालत से वर्ष 2008 में हुए आरुषि तलवार हत्याकांड मामले की दोबारा जांच कराने का आग्रह किया।
इसबीच, तलवार परिवार के घरेलू नौकरों के वकील नरेश यादव ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जाना चाहिए ताकि नौकरों को फिर से नहीं फंसाया जाना सुनिश्चित हो सके।
उल्लेखनीय है कि 16 मई, 2008 को 14 वर्षीया आरुषि तलवार का शव नोएडा के जलवायु विहार स्थित उसके फ्लैट से बरामद किया गया था।
इस घटना के बाद तलवार को गिरफ्तार किया गया था लेकिन सबूत नहीं मिलने पर उन्हें छोड़ दिया गया।
इस मामले में तलवार का सहायक कृष्णा, तलवार दंपत्ति के मित्र दुरानी परिवार का नौकर राज कुमार, पड़ोस के ही एक अन्य नौकर विजय मंडल को भी जांच के दौरान पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में उन्हें भी सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications