ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड : घटनाक्रम
इस मामले से जुड़े घटनाक्रम पर एक नजर..
22 जनवरी, 1999 : आस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों फिलिप (10) और टिमोथी (छह) को उग्र भीड़ ने उस समय जलाकर मार डाला था जब वे जिले के मनोहरपुर गांव में गिरजाघर के सामने अपने वाहन में सोए हुए थे।
29 जनवरी 1999 : केंद्र सरकार ने इस मामले में छानबीन के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. पी. वधवा के नेतृत्व में न्यायिक आयोग का गठन किया।
24 फरवरी, 1999: उड़ीसा सरकार ने इस मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का फैसला लिया।
21 जून, 1999 : वधवा आयोग ने 150 पृष्ठों की रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपी। इसमें दारा सिंह दोषी ठहराया गया।
22 जून, 1999 : सीबीआई ने दारा सिंह सहित 18 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए।
31 जनवरी, 2000 : उड़ीसा के मयूरभंज जिले के वन क्षेत्र से सीबीआई ने दारा सिंह को गिरफ्तार किया।
एक मार्च, 2001 : इस मामले पर भुवनेश्वर में सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई शुरू।
15 सितम्बर, 2003 : अदालत ने दारा सिंह सहित 12 को दोषी करार दिया।
22 सितम्बर, 2003 : अदालत ने दारा सिंह को मृत्यदंड और अन्य सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
19 मई 2005: उड़ीसा उच्च न्यायालय ने 106 पृष्ठों के फैसले में दारा सिंह की सजा-ए-मौत को उम्रकैद में तब्दील कर दिया जबकि एक अन्य अभियुक्त महेंद्र हेम्बराम की सजा को बरकरार रखा। साथ ही अदालत ने अन्य लोगों को बरी कर दिया।
21 जनवरी,2011 : सर्वोच्च न्यायालय ने दारा सिंह और हेम्बराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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