मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं का विरोध प्रदर्शन

मानवाधिकार हनन का मुद्दा चीन और अमरीका के लिए एक बड़ा मुद्दा है.चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ की अमरीका यात्रा का बहुत से मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं ने विरोध किया है.वान यान्हाई उन्हीं कार्यकर्त्ताओं में से एक है.
वान यान्हाई कई सालों से चीन के बाहर रह रहें हैं.वह अपने देश वापस जाना चाहते हैं लेकिन यह संभव नहीं.वह बीजिंग में मानव अधिकार की एक संस्था चलाते थे. वहां उनकी गतिविधियों के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा.
जब चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ व्हाइट हॉउस में राष्ट्रपति ओबामा से मानव अधिकार और दूसरे मुद्दों पर बातें कर रहे थे ठीक उसी वक़्त उसके बग़ल वाली एक इमारत में चीन के कई नागरिक वहां मानव अधिकार के उल्लंघन पर चिंता जता रहे थे.वान यान्हाई ने कहा, "मैं अपने देश वापस जाना चाहता हूं और वहां आज़ादी के माहौल में जीना चाहता हूं. "
तिब्बत का मुद्दा दोनों देश के बीच रिश्तों को बेहतर करने में शायद सबसे से बड़ी रुकावट है.ग्वांग संग्द्रोल तिब्बत की रहने वाली हैं आज कल अमरीका में रहती हैं.उन्होंने चीनी सरकार की कथित दमनकारी नीतियों को कुछ इस तरह बयान किया ,''मैं 13 साल की उम्र से चीनी जेल की सलाख़ों के पीछे रही हूं और मैंने 13 साल जेल के अंधेरे में गुज़ारे हैं. मेरे साथ जितना अत्याचार हुआ है शायद ही किसी और के साथ हुआ होगा"
चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने स्वीकार किया है कि मानव अधिकार के मामले में अभी उनकी सरकार को और बहुत कुछ करना है.चार दिनों की सरकारी यात्रा पर मंगलवार को अमरीका पहुंचे राष्ट्रपति हू जिंताओ ने अपने दौरे के दूसरे दिन बुधवार को राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाक़ात की.उसके बाद एक संयुक्त प्रेस कांफ़्रेंस में एक सवाल के जवाब में हू जिंताओ ने कहा की उनके देश ने मानव अधिकार को लागू करने की दिशा में कई क़दम उठाए हैं.इस मौक़े पर राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि चीन को मानव अधिकार को लागू करने के लिए और कोशिशें करनी चाहिए.












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