बंगाल के सशस्त्र शिविरों को नष्ट करे सुरक्षा बल : अदालत
अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि वह सात जनवरी को नेताई गांव जनसंहार के पीड़ितों को मुआवजा दे, लेकिन घटना की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच का आदेश देने से इंकार किया।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.एन. पटेल और न्यायमूर्ति ए.के. राय की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश जारी कर राज्य पुलिस के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) से जांच जारी रखने को कहा। अदालत हालांकि जांच की निगरानी करेगी।
अदालत ने यह आदेश कलकत्ता उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन द्वारा दायर एक जनहित याचिका के संदर्भ में जारी किया। याचिका में नक्सलियों के गढ़ लालगढ़ के निकटवर्ती गांव में हुई हिंसा की सीबीआई जांच की अपील की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिंसा तब भड़की जब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक नेता के आवासीय परिसर में चल रहे सशस्त्र शिविर से गोलीबारी की गई। माकपा राज्य में 1977 से लगातार सत्तारूढ़ वाम मोर्चा में मुख्य साझेदार है।
पीड़ितों को सात दिनों के भीतर मुआवजा देने का निर्देश देते हुए अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को एक लाख एवं अन्य प्रत्येक घायल को 50,000 रुपये दिए जाएं।
कहा गया है कि सशस्त्र शिविर पश्चिम मिदनापुर, पुरुलिया और बांकुड़ा जिलों के जंगली इलाके-जंगल महल में चलाए जा रहे हैं, जहां नक्सली सक्रिय हैं। खंडपीठ ने संयुक्त सुरक्षा बल को निर्देश दिया कि वह इन इलाकों में तलाशी अभियान चलाकर ऐसे शिविरों को ढूढ़ निकाले और उन्हें नष्ट कर दे।
खंडपीठ ने राज्य के गृह सचिव से आदेश की अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को भी कहा।
अदालत ने कहा कि रिपोर्ट मामले की अगली सुनवाई की तारीख चार फरवरी को पेश की जाए, जिसमें सीआईडी जांच की प्रगति का ब्योरा हो।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications