किसान आत्महत्या से मेरे मंत्रालय का सम्बंध नहीं : देशमुख
नई दिल्ली, 20 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में शपथ लेने के अगले दिन गुरुवार को विलास राव देशमुख ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की यह राय कि उनका सम्बंध किसानों का उत्पीड़न करने वाले सूदखोरों से है, एक 'अलग मामला' है।
देशमुख ने महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या का सम्बंध उनके मंत्रालय से होने से इंकार किया तथा अपने नए दायित्व को 'पदोन्नति' बताया।
गुरुवार को कार्यभार ग्रहण करने के बाद देशमुख ने संवाददाताओं से कहा, "एक अलग मामले को अन्य चीजों से नहीं जोड़ा जा सकता।" अदालत ने पिछले महीने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके देशमुख का उन सूदखोरों से कथित सम्बंध पर सवाल उठाया था, जिन्होंने राज्य में विदर्भ क्षेत्र के किसानों का उत्पीड़न किया है।
देशमुख ने कहा, "मैं सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर कोई टिप्पणी करना नहीं चाहता। फैसला आया है, लेकिन हम सुधार लाने का उपाय तलाश रहे हैं। इस मामले पर मेरे वकील के साथ विमर्श चल रहा है।"
उन्होंने यह भी कहा कि उनके ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में चयन और महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के बीच कोई सम्बंध नहीं है।
उन्होंने कहा, "इन दोनों चीजों को जोड़ा नहीं जा सकता, क्योंकि दोनों अलग-अलग चीजें हैं। महाराष्ट्र में वजह बिल्कुल अलग है और अब, जबकि राज्य सरकार एवं प्रधानमंत्री ने कुछ पैकेज दिए हैं, स्थिति सुधरी है। यह ऐसी चीज नहीं है, जिसमें सुधार नहीं हो सकता।"
ज्ञात हो कि वर्ष 1999 से 2003 और फिर 2004 से 2008 तक देशमुख जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, उस दौरान उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने किसानों की आत्महत्या को रोकने के पर्याप्त उपाय नहीं किए।
देशमुख ने कहा कि ग्रामीणों के लाभ के लिए बनी नरेगा (राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) जैसी योजनाएं विदर्भ में विफल रही हैं।
नए दायित्व के सम्बंध में उन्होंने कहा, "यह मेरी पदोन्नति है, क्योंकि मेरा मंत्रालय देश की 80 फीसदी आबादी से जुड़ा हुआ है।" उन्होंने कहा कि विभाग में परिवर्तन करना प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का विशेषाधिकार है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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