पंचायत के फरमान से परिवार का हुक्का-पानी बंद
मामला जिले के मैलानी थाना क्षेत्र के सलेमपुर गांव का है, जहां नि:संतान वृद्ध दंपति मोइनुद्दीन (60) और मरियम (58) के घर का चूल्हा परचून की गुमटी से सामान बेचकर जलता था, लेकिन गांव की पंचायत ने एक फरमान जारी कर उससे सामान खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया है। चार दिन से एक पैसे की बिक्री नहीं हुई है। गुमटी के आस-पास पंचायत का कड़ा पहरा रहता है कि कोई सामान न खरीदने पाए।
मरियम ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा कि पंचायत के लोग किसी को गुमटी पर आने नहीं देते हैं। गुमटी से चार पैसे का सामान बेचकर किसी तरह हम अपना पेट पालते थे। न तो हमारे पास खेत है और न ही कोई कमाई का दूसरा जरिया। गांव के लोगों को हमसे कोई वास्ता न रखने की सख्त हिदायत दी गई है।
यह प्रतिबंध गांव की पंचायत ने लगाया है, जिसे अंजुमन कहते हैं। दरअसल, अंजुमन गांव में एक मदरसा बनवा रही है, जिसके लिए वह मोइनुद्दीन और मरियम से 500 रुपये चंदा मांग रही थी। गरीब होने की वजह से जब उन्होंने चंदा देने से इंकार कर दिया तो गत 15 जनवरी को उन्हें मजहब का दुश्मन घोषित कर उनसे कोई वास्ता न रखने का फरमान जारी कर दिया गया।
फरमान जारी करने वाली अंजुमन के प्रमुख मुख्तार अंसारी ने संवाददाताओं से कहा कि जो लोग मजहबी कामों में शरीक नहीं होते वो इस्लाम के दुश्मन होते हैं।
उन्होंने कहा कि सभी गांव वालों को सख्त हिदायत दी गई है कोई भी व्यक्ति इस दंपति से वास्ता नहीं रखेगा। अगर किसी ने उनसे ताल्लुक रखा या बात करते हुए पाया गया तो उस पर पांच रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
यह फरमान लिखा एक बोर्ड मोइनुद्दीन की गुमटी के पास लगा दिया गया है। करीब हजार लोगों की आबादी वाले इस मुस्लिम बाहुल्य गांव में पंचायत के डर से मोइनुद्दीन और मरियम की मदद करने का कोई साहस नहीं जुटा पाया। पास के एक गांव के कुछ परिवार इस दंपति के लिए खाने का इंतजाम कर रहे हैं।
उधर इस बारे में पूछे जाने पर मैलानी थाना प्रभारी राम सेवक सिंह ने गुरुवार को आईएएनएस से कहा कि 'हमें स्थानीय समाचार चैनलों के जरिए आज इस बारे में पता चला है। अगर ऐसा है तो यह बहुत गंभीर मामला है। हम मामले की जांच करवा रहे हैं। दोषियों पर अवश्यक कार्रवाई की जाएगी।'
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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