खुद बनाएं अपनी सीमाएं

नई दिल्ली, 20 जनवरी (आईएएनएस)। आप जो कुछ कर रहे हैं, खुद से पूछिए कि क्या यह आपके उद्देश्य सम्बंधित एवं जरूरी है और क्या इसे दूसरे को सौंपा जा सकता है या बाद में किया जा सकता है? साथ में इस चीज की भी जांच कीजिए कि क्या यह तेजी से एवं सस्ते तरीके से करना आसान है? पूरी क्षमता से काम करने के लिए हमें ऐसी चीजों को बाहर निकालना चाहिए जो तनाव उत्पन्न करते हैं।

तनाव का एक बड़ा कारण यह है कि हम दूसरों को अपना जीवन नियंत्रित करने देते हैं। आपको अपनी खुद सीमाएं बनानी एवं परिभाषित करनी होगी कि आप कहां तक अन्य को अपने रास्ते में आने देते हैं।

यदि हम जीवन से सर्वश्रेष्ठ लेना चाहते हैं तो हमें जीवन को ताश के खेल की तरह लेना चाहिए जिसमें हमें अच्छा खेलने के लिए निश्चित होना चाहिए। हम ताश कैसे खेलते हैं यह हमारी आजादी है। एक आजाद मंशा के पीछे सारी मुश्किलें क्यों न बहुत बड़ी हो जाती हैं। किसी कार्य को करने के लिए हमें अपना मनोबल सबसे ऊंचे पायदान तक ले जाना चाहिए।

हम अपनी दुनिया बदल सकते हैं, अपनी सोच बदलकर एवं नए विचार लाकर। अपनी दुनिया बदल सकते हैं, अपनी सोच बदलकर एवं नए विचार लाकर। लेकिन हमें यह स्वीकार करना चाहिए के प्रतिकूल स्थिति में हमें यह करना पड़ता है।

जीवन के किसी क्षेत्र में सफलता, हमारे द्वारा किए गए कुल प्रयत्नों का फल है। आपकी जीवन में प्राथमिकता आपके जीवन के प्रकार को दर्शाती है। ऐसी कोई चीज तकदीर नहीं है जो चीजों को जो हम करते हैं उसके विपरीत जाने दे। एक बात ज्यादा जरूरी है जो ध्यान रखिए कि यदि आप कुछ नहीं करते हैं तो कुछ हो जाएगा।

जैसे कि हम मनुष्य हैं, हम भावनाओं एवं भौतिक ऊर्जा दोनों पर अपने लक्ष्य एवं उद्देश्य की प्राप्ति के लिए निर्भर रहते हैं। हमें इस बात का निश्चय कर लेना चाहिए कि गुस्सा, क्रोध, डर, दुख इत्यादि चीजों को खुद से दूर रखेंगे जो कि हमारी ऊर्जा का क्षय करती व घटाती है।

अधिक ऊर्जा का अर्थ है अधिक सकारात्मक भावना व जोश ऊर्जा को बढ़ाने का एक रास्ता यह है कि खुद को खुश रखें एवं अपने आसपास मनोरंजन को दैनिक जीवन में एवं परिस्थिति में ढूंढ़ें। हंसी नकारात्मक भावना को दूर भगाती है। परिस्थिति एवं स्तर हमेशा बदलाव रहता है। लेकिन जो चीज मायने रखती है, वह है उसे स्वीकार करके उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ देना।

सभी क्रिया-कलापों का विचार खुद के बारे में अच्छा महसूस करना है। सबसे जरूरी चीज जो आप में ध्यान रखें कि आप, इस बहुक्रियात्मक दुनिया एवं रवैया, जिसे अधिकतर लोगों ने अपनाया है, में जो भी काम करें उस पर पूरा ध्यान दें।

एक समय में एक ही चीज पर ध्यान देने से न केवल दक्षता बढ़ती है, बल्कि यह हमें जो कुछ भी हम कर रहे हैं उसे और ज्यादा अच्छा एवं व्यापक बनाने के लायक बनाती है। यह सब एक ही विचार पर आधारित है कि पूरा ध्यान एवं मन एक ही विषय पर या स्थान जहां पर भी है लगाएं।

जीवन में अधिकतर समय यह मायने नहीं रखता कि हम क्या कर रहे हैं। मायने यह रखता है हमारे अंदर क्या प्रतिभा या ज्ञान है। अपनी असफलता के बारे में दूसरे से शिकायत करने का कोई फायदा नहीं है। आपको शिकायत उनसे करनी चाहिए जो आपके हालात सुधारने में मदद करें।

दस में से नौ बार सफलता कर्म से जुड़ी होती है। आप बैठे रहते हैं तो कर्म आपको कहीं नहीं ले जाएगा। हमारे जीवन का वर्णन हम प्रचलित रीति-रिवाज और खास तरह के पहले के बनाए तरीकों से करते हैं एवं केवल 10 प्रतिशत के लिए और कभी-कभी उससे भी कम के लिए हम जागरूक एवं सोच समझ कर प्रयास करते हैं।

जब हम सुबह में उठते हैं, तो सामान्यत: हम बाथरूम में जाते हैं एवं अपने दांतों को साफ करते हैं। जब हम दांत साफ करते हैं तो साधारणत: हम अपने दांतों पर ध्यान नहीं देते हैं। ऐसे ही कई काम हैं जैसे जूते का फीता बांधना या भोजन करना या चाय या कॉफी पीना जो कि समय के साथ अपने आप होते जाता है। एक ही कार्य को बार-बार करने से हम इसे यांत्रिक बना देते हैं। तब यह अंतर्निहित आदत बन जाती है, जिसे दिमाग की हलचल की जरूरत नहीं होती।

(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड बुक्स प्रा.लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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