कृपाण के साथ क्यूबेक असेंबली में प्रवेश नहीं
टोरंटो, 20 जनवरी (आईएएनएस)। कनाडा में बुधवार को कृपाण का मामला एक बार फिर उस समय गरम हो गया जब चार सिख सदस्यों को कृपाण के साथ क्यूबेक प्रांतीय असेंबली में प्रवेश करने से रोक दिया गया।
राजनीतिक पार्टी ब्लॉक क्यूबेकोइज कृपाण पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने की मांग कर इस मामले को और उछाल रही है। जबकि कनाडाई संसद में इसे धारण करने वाले दो सिख सांसद हैं। सार्वजनिक स्थलों पर कृपाण पहनने की इजाजत देने वाले कनाडा के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के छह साल बाद यह घटना हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार चारों सिख सदस्य कृपाण और हिजाब जैसे धार्मिक प्रतीकों को धारण करने सम्बंधी एक विधेयक पर चर्चा के लिए असेंबली की एक समिति के सामने पेश होने के लिए गए थे। इन सदस्यों के पास 'कृपाण' होने पर सुरक्षाकर्मियों ने इन्हें बाहर ही रोक लिया।
असेंबली सुरक्षा प्रमुख पियरे डचस्ने ने कहा, "कृपाण और चाकू में कोई अंतर नहीं है। यह नुकीली वस्तु की तरह ही है।"
चारों सिख सदस्यों के वकील बलप्रीत सिंह ने बताया, "यह अजीब विडम्बना है कि हम यहां धार्मिक प्रतीकों को मान्यता प्रदान करने के मुद्दे पर बात कर रहे हैं जबकि हमें इन प्रतीकों को धारण करने ही दिया नहीं जा रहा है।"
उन्होंने कहा, "धार्मिक प्रतीकों को यहां भी मान्यता दी जानी चाहिए। कनाडा की संसद में इसकी इजाजत है। कनाडा के सर्वोच्च न्यायालय ने इसे पहले ही स्वीकृति दे दी है यहां तक कि कनाडा की सभी असेंबली में इसको मान्यता प्राप्त है। ऐसे में मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि क्यूबेक में इसे लेकर क्या समस्या है।"
उधर, सिख सदस्यों को असेंबली में प्रवेश से सुरक्षा एजेंसी द्वारा रोके जोने को उचित ठहराते हुए क्यूबेक की मुख्य विपक्षी पार्टी ब्लॉक क्यूबेकीज ने बुधवार को कृपाण पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने की मांग करके इस मसले को और हवा दे दी है।
पार्टी के नेता क्लाउड डीबेलेफ्यूली ने कहा कि कनाडाई संसद में केवल सूट पहनना चाहिए और सिखों पर कृपाण के साथ प्रवेश पर रोक लगाई जानी चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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