सदीक मियां बने सिद्घेश्वर दास बाबा
रामजानकी मंदिर अरवल जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर सोहसा रामबाग में स्थित है। गया जिले के खिजरसराय थाना क्षेत्र में सलायत मियां के घर जन्मे सदीक ने इंटरमीडियट तक की शिक्षा ग्रहण की है। उन्होंने आईएएनएस को बताया कि बचपन में जब वह दूसरी या तीसरी कक्षा में पढ़ते थे तब वह एक शिक्षक सूरज जी महाराज की प्रेरणा से राम भक्ति की ओर उन्मुख हुए और आज भी उनकी भक्ति से उन्हें सुकून मिलता है।
सिद्धेश्वर बाबा ने कहा कि बाद में वह सोहसा गांव आ गये और रामजानकी मंदिर ठाकुरबाड़ी के महंत श्याम सुंदर दास के साथ राम भक्ति में रम गए। उन्होंने कहा कि ठाकुरबाड़ी की सेवा उनका दायित्व हो गया है और उन्हें इसमें परमसुख की प्राप्ति होती है। यही नहीं काशी, अयोध्या जैसे कई हिन्दू तीर्थस्थलों का भ्रमण कर चुके सदीक के पास हिन्दू धर्म ग्रंथों का भंडार भी है। ऐसा भी नहीं कि उन्हें उर्दू नहीं आती।
वह कहते हैं कि उन्हें उर्दू और अरबी भी आती है परंतु मनुष्य को जिस धर्म में आस्था हो उसे ही अपनाना चाहिये। धर्म थोपा नहीं जाता। धर्म पर आस्था होने से ही लोगों को मुक्ति मिल सकती है।
85 वर्षीय सदीक की अंतिम इच्छा है कि उनकी मृत्यु के बाद उनके शव को बिना किसी कानूनी और धार्मिक अड़चन के गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया जाये। रूद्राक्ष की माला लिए राम नाम का जाप करने वाले सदीक कहते हैं कि धर्म के नाम पर लोगों को बांटना गलत है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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