भारत एक मजबूत बांड बाजार बनाएगा : मुखर्जी
ब्रिटिश-इंडिया इंफ्रास्ट्रक्च र ग्रुप की स्थापना के अवसर पर उन्होंने बांड बाजार का विकास करने की योजना का खुलासा किया।
मौजूदा नियमों के मुताबिक भारतीय कम्पनियां भारतीय मुद्रा में बांड जारी कर सकती हैं, जिसे देश के कॉरपोरेट बांड बाजार में खरीदा-बेचा जा सकता है।
विदेशी निवेशक इस बांड बाजार में अभी अधिकतम कुल 20 अरब डॉलर तक का निवेश कर सकते हैं, जिसमें से पांच अरब डॉलर अकेले ढांचागत क्षेत्र को लक्षित है।
मंत्री ने कहा कि सरकार मुद्रा बढ़ाने के लिए एक नियामक कानून बनाने पर विचार कर रही है। वित्त मंत्रालय इंफ्रास्ट्रक्च र डेट फंड जैसे विकल्पों के निर्माण पर विचार कर रहा है।
मंत्री ने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि (2012-17) में ढांचागत क्षेत्र में 1000 अरब डॉलर का निवेश करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें से आधा निवेश निजि क्षेत्र से होगा।
उन्होंने विदेशी कम्पनियों खास तौर से ब्रिटिश कम्पनियों को भारत के ढांचागत क्षेत्र में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया।
नवगठित समूह को सम्बोधित करते हुए ब्रिटेन के मंत्री विंस केबल ने कहा कि ब्रिटेन की बहुत सारी कम्पनियां भारत में निवेश करना चाहती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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