बुद्धदेब ने प्रधानमंत्री से कहा, तृणमूल कांग्रेस व नक्सलियों में गठजोड़ (लीड-1)
भट्टाचार्य ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "सुबह मैं चिदम्बरम से मिला और अब प्रधानमंत्री कार्यालय से आ रहा हूं।"
उन्होंने कहा, "मैंने प्रधानमंत्री से कहा कि तृणमूल नक्सलियों और उनके संगठनों से मिली हुई है, इसलिए खतरनाक स्थिति पैदा हो गई है। पहले तृणमूल के लोग नक्सलियों से गुप्त तरीके से मिलते थे, लेकिन अब यह काम वे खुलेआम कर रहे हैं। कई सूत्रों और गिरफ्तार नक्सली नेताओं ने इसकी पुष्टि की है।"
उन्होंने कहा, "कई ऐसे उदाहरण हैं कि तृणमूल कार्यकर्ता विस्फोटों में घायल नक्सलियों का हाल पूछने अस्पतालों में गए थे। वे उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले गए। यह गंभीर समस्या है। पिछले महीने दोनों ने दो संयुक्त जनसभाएं की थीं।"
गौरतलब है कि तृणमूल केंद्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस की सहयोगी दल है।
भट्टाचार्य ने संवाददाताओं से कहा, "हमारे राज्य में नक्सल आंदोलन 1967 में शुरू हुआ था जो 1971 तक चला। हम उन्हें प्रशासनिक और राजनीतिक तरीके से पराजित कर सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में नक्सल समस्या फिर से पैदा हुई है, लेकिन इस समय नक्सलबाड़ी आंदोलन की तरह नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और झारखण्ड की तरह।
राज्य में नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले पश्चिमी मिदनापुर जिले के नेताई गांव में सात जनवरी को हुई राजनीतिक हिंसा में सात लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद चिदम्बरम ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा के लिए उन्हें दिल्ली आमंत्रित किया था।
भट्टाचार्य राज्य के राजनीतिक हालात, खासतौर से राज्य में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के इस आरोप पर चर्चा के लिए मंगलवार को दिल्ली पहुंचे कि तृणमूल कांग्रेस के नक्सलियों के साथ सम्बंध हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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