पर्यावरण के अनुकूल सरकारी भवनों के लिए दिशा निर्देश नहीं
नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। जलवायु परिवर्तन के खिलाफ दुनिया भर में जारी मुहिम में बढ़चढ़कर हिस्सा लेने वाले भारत में सरकारी भवन या कार्यालयों को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए कोई दिशानिर्देश निर्धारित नहीं किए गए हैं। यह खुलासा सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के मिली जानकारी से हुआ।
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश बत्रा ने जून 2010 में वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश से आरटीआई कानून के तहत यह जानना चाहा था कि केंद्र सरकार के भवनों को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए क्या दिशा निर्देश हैं।
मंत्रालय ने अवकाश प्राप्त नौ सेना अधिकारी बत्रा को अगस्त में लिखा कि सरकार खुद ऐसे दिशा निर्देश की जरूरत समझती है। यदि बत्रा चाहें तो वह प्रस्तावित दिशा निर्देश का मसौदा भेज सकते हैं।
बत्रा ने आईएएनएस से कहा कि यह हैरत की बात है कि मेरे सवालों का जवाब देने की जगह सरकार ने खुद मुझ से ही ऐसे कानून का सुझाव देने के लिए कहा। बहरहाल उन्होंने पर्यावरण सम्बंधी मुद्दों पर काम करने वाली एक अमेरिकी संस्था के कुछ दस्तावेज भेज दिए।
बत्रा ने इसके बाद आरटीआई कानून की मदद से जानना चाहा कि उनके प्रस्ताव पर अब तक क्या प्रगति हुई है, लेकिन बत्रा के बार-बार आवेदन के बाद भी उन्हें मंत्रालय से अब-तक कोई जवाब नहीं मिला।
बत्रा ने पिछले साल प्रधानमंत्री कार्यालय से भी इस मुद्दे पर वास्तविकता जानने के लिए आरटीआई के तहत आवेदन किया था। इसमें उन्हें यह भी जानना चाहा था कि क्या कार्यालयों में ऊर्जा संरक्षण, बिजली और पानी की बचत, कागज विहीन ई-प्रशासन या पर्यावरण के अनुकूल कार्यालय बनाने के लिए और क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
बत्रा को उनके सवालों के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से 27 जून 2000 से लेकर 21 अप्रैल 2010 तक के बीच जारी आठ परिपत्रों की प्रतियां दी गईं। इनमें से चार जरूरत न होने पर बिजली का स्विच बंद रखने और ई-प्रशासन सम्बंधी कुछ निर्देश थे। पर्यावरण अनुकूल भवनों के लिए इतना काफी नहीं है।
बत्रा अपने सवालों का जवाब हासिल करने के लिए अब केंद्रीय सूचना आयोग को आवेदन करने करने की योजना बना रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि हाल में कानकुन में हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में रमेश ने प्रस्ताव रखा था कि भारत जैसे विकासशील देशों सहित सभी राष्ट्रों को उत्सर्जन कम करने के लिए कानूनी तौर पर बाध्यकारी कदम उठाने चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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