पत्नी की पिटाई के आरोपों के बाद राजनयिक का तबादला (राउंडअप)

विदेश मंत्रालय के मुताबिक राजनयिक पर पत्नी को पीटने के लगे आरोपों से देश को 'शर्मिदगी का सामना' करना पड़ रहा था और इससे देश की छवि खराब हो रही थी।

विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया, "विदेश मंत्रालय ने मामले को गम्भीरता से लिया है। इससे देश को शर्मिदगी का सामना करना पड़ रहा था।"

भारतीय उच्चायोग में तीसरे महत्वपूर्ण वरिष्ठ राजनयिक एवं मंत्री (आर्थिक) वर्मा उन्मुक्ति कानूनों का हवाला देकर अपनी पत्नी पर हमले के आरोपों से बच गया था। ब्रिटेन की पुलिस ने वर्मा से पूछताछ भी की थी।

सूत्रों ने बताया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1989 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के अधिकारी वर्मा को अभी दिल्ली स्थानांतरित किया जा रहा है। उन पर आरोपों की जांच के बाद मंत्रालय आगे की कार्रवाई करेगा।

पिछले महीने हुई घटना पर विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय उच्चायोग और मंत्रालय को इसके बारे में पता है और वे सावधानी पूर्वक इस मामले को देख रहे हैं।

समाचार पत्र 'डेली मेल' में रविवार को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक वर्मा की पत्नी अपनी सुरक्षा के लिए अपने पांच वर्षीय लड़के के साथ उनसे अलग रह रही थीं।

समाचार पत्र ने परोमिता वर्मा के हवाले से बताया कि उन्हें अपने जीवन को खतरा था और उन्होंने मानवीय आधार पर ब्रिटेन में रहने के लिए आवेदन किया।

वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने तीखी नोकझोंक के बाद अपनी पत्नी पर हमला किया। इसे लेकर पुलिस अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की लेकिन उनकी राजनयिक हैसियत के चलते वे वर्मा को गिरफ्तार नहीं कर सके थे।

उल्लेखनीय है कि विएना कन्वेंशन के तहत विदेशी अधिकारियों, उनकी पत्नियों, बच्चों और उनके कर्मचारियों को अभियोग का सामना करने से संरक्षण प्राप्त है।

वर्मा का मुख्य कामकाज भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार को बढ़ावा देना था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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