'राजनयिक को वापस बुलाने से खत्म होगा विवाद'
सूत्रों ने बताया, "ब्रिटिश अधिकारियों ने भारत से कहा था कि वे या तो राजनयिक को स्वदेश बुलाए अथवा राजनयिक छूट खत्म करे जिससे लंदन में उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। अब चूंकि उसे वापस बुलाने का फैसला हो गया है, इसलिए यह मामला यहीं खत्म होता है।"
ब्रिटिश विदेश कार्यालय के अधिकारी पिछले दिनों लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में अधिकारियों से मिले थे और इस मसले पर चर्चा की थी। ब्रिटेन ने भारत से कहा था कि वर्मा को राजनयिक छूट से पृथक किया जाए। उसने कहा था, "ब्रिटेन में कार्यरत राजनयिक द्वारा कानून तोड़ने को वह बर्दाश्त नहीं करेगा।"
विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि अब जबकि राजनयिक को बुलाने का फैसला कर लिया गया है, उम्मीद है कि राजनयिक विवाद खत्म हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि राजनयिक द्वारा पत्नी को पीटने के लगे आरोपों से देश को 'शर्मिदगी का सामना' करना पड़ा और इससे देश की छवि खराब हुई।
विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया, "विदेश मंत्रालय ने मामले को गम्भीरता से लिया है क्योंकि इससे देश को शर्मिदगी का सामना करना पड़ रहा था।"
भारतीय उच्चायोग में तीसरे महत्वपूर्ण वरिष्ठ राजनयिक (आर्थिक) वर्मा उन्मुक्ति कानूनों का हवाला देकर अपनी पत्नी पर हमले के आरोपों से बच गया था। ब्रिटेन की पुलिस ने वर्मा से पूछताछ भी की थी।
सूत्रों ने बताया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1989 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के अधिकारी वर्मा को अभी दिल्ली स्थानांतरित किया जा रहा है। उन पर आरोपों की जांच के बाद मंत्रालय आगे की कार्रवाई करेगा।
समाचार पत्र 'डेली मेल' में रविवार को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक वर्मा की पत्नी अपनी सुरक्षा के लिए अपने पांच वर्षीय लड़के के साथ उनसे अलग रह रही थीं।
समाचार पत्र ने परोमिता वर्मा के हवाले से बताया कि उन्हें अपने जीवन को खतरा है और उन्होंने मानवीय आधार पर ब्रिटेन में रहने के लिए आवेदन किया है।
वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने तीखी नोकझोंक के बाद अपनी पत्नी पर हमला किया। इसे लेकर पुलिस अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की लेकिन उनकी राजनयिक हैसियत के चलते वे वर्मा को गिरफ्तार नहीं कर सके थे।
उल्लेखनीय है कि विएना कन्वेंशन के तहत विदेशी अधिकारियों, उनकी पत्नियों, बच्चों और उनके कर्मचारियों को अभियोग का सामना करने से संरक्षण प्राप्त है।
वर्मा का मुख्य कामकाज भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार को बढ़ावा देना था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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