जींस-टॉप पहनने पर प्रतिबंध का विरोध

ज्ञात हो कि मुजफ्फरनगर के भैंसवाल गांव में रविवार को हुई बत्तीसा खाप की पंचायत में चौधरी सूरजमल ने सर्वसम्मति से फैसला लिया था कि क्षेत्र की लड़कियों के जींस और टॉप पहनने पर पाबंदी लगाई जाए, क्योंकि इसी वजह से महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं। पंचायत में इंटर कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियों के मोबाइल फोन के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी।

खाप ने पांच सदस्यीय महिलाओं की निगरानी टीम गठित की है, जिसमें सुनीता, अमृता, मूर्ति, महिमा और दरियाई को शामिल किया गया है। टीम को भैंसावाल गांव तथा आसपास के क्षेत्र में इस फरमान को लागू कराने की जिम्मेदारी दी गई है।

बत्तीसा खाप के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के कई महिला संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता बत्तीसा खाप के चौधरियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

अस्तित्व संस्था की रेहाना अदीव और ऑली संस्था की अवंतिका, देवांशी, फरजाना और महिला समख्या से जुड़ी शिखा राणा और चंद्रकांता कहती हैं कि ये फरमान महिलाओं के अधिकार का हनन है।

भैंसवाल गांव के डा. सुधीर पवार का कहना है कि ये प्रतिबंध छोटी सोच का परिणाम है और इस गांव की करीब 17 लड़कियां सरकारी व निजी संस्थानों में विभिन्न पदों पर तैनात हैं।

समाजशास्त्री डा. गीतांजलि वर्मा का मानना है कि खाप इस तरह के फैसले बगैर सोचे-समझे दे रही है। शिक्षित समाज में जीवनशैली, रहन-सहन, खान-पान के मुद्दे निजी हैं। इसमें किसी बाहरी व्यक्ति को हस्तक्षेप करने की इजाजत नहीं होनी चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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