आगरा में यमुना प्रदूषित होने से जलापूर्ति का संकट
अधिकारियों के मुताबिक युमना नदी में शुद्ध जल धारा मुश्किल से ही कभी दिखती है। दिल्ली और हरियाणा के कस्बों का दूषित जल बहकर यहां आ रहा है।
शहर में एक सदी पुराने आगरा वाटर वर्क्स से पानी की आपूíत सही तरीके से नहीं हो पा रही है। प्रदूषित होने की वजह से यहां के पानी का रंग पीला हो गया है, जिसके बाद स्थानीय लोगों में उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने के खतरे को लेकर चिंता की स्थिति है।
आगरा नगर निगम के कई पार्षदों के मुताबिक दिसम्बर से ही शहर के विभिन्न भागों में जलापूर्ति नहीं हो रही है। प्राय: लोग पानी की समस्या से जूझते रहते हैं। पार्षदों ने निगम की महापौर अंजुला सिंह माहौर से उक्त जल संस्थान का नवीनीकरण कराने की मांग की थी।
कांग्रेस के राज्य सचिव सुमीत वैभव ने कहा, "सर्दी का मौसम होने की वजह से पानी की मांग कम है लेकिन कुछ सप्ताह बाद जब तापमान बढ़ेगा तब हालात क्या होंगे।"
विजय नगर कॉलोनी के निवासी अनुभव गुप्ता ने कहा पिछले कई दिनों से बदबूदार पानी की आपूर्ति की जा रही है। पानी का रंग भी पीला है। शहर के आधे इलाके में शुक्रवार को जलापूर्ति ठप्प रही। गुरुवार को भी रुक-रुक कर जलापूर्ति हुई थी।
जल संस्थान के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "यमुना में पानी का स्तर कम हो गया है। गोकुल बैराज से आने वाला पानी पूरी तरह से दूषित है और उसे शुद्ध किए जाने की जरूरत है।"
आगरा के क्षेत्रीय आयुक्त सुधीर एम. बॉबदे और जिलाधिकारी अमृत अभिजात ने राज्य के सिंचाई विभाग से कहा है कि गंगा नहर से युमना में पानी छोड़ा जाए।
जल संस्थान के महाप्रबंधक जवाहर राम ने कहा कि समस्या से निपटने के लिए यमुना में तत्काल 250 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की आवश्यकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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