बच्चों संग मां ने लिया पहली कक्षा में दाखिला

पंजाब प्रांत के दाउदखेल की निवासी अस्मा ने अपने दो बच्चों के साथ मियांवाली स्थित शासकीय कन्या विद्यालय में अपना नाम लिखवाया है।

जब स्कूल शिक्षक ने अस्मा से पूछा कि वह दाखिले के लिए अपना नाम भी क्यों लिखवा रही है, तब उसने कहा कि वह हमेशा से स्कूल जाना चाहती थी लेकिन उसके माता-पिता ने उसकी यह ख्वाहिश पूरी नहीं की।

समाचार पत्र 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के मुताबिक अस्मा कहती है, "मैं हमेशा उनसे स्कूल जाने के लिए झगड़ती थी लेकिन उन्होंने मुझे कभी स्कूल नहीं जाने दिया। फिर मेरी शादी हो गई और बच्चे हो गए और मुझे लगा कि मैंने अपना पढ़ाई करने का अवसर खो दिया।"

अस्मा शुरुआत में तो अपनी बेटियों के ही दाखिले के लिए स्कूल गई थी। उसके मुताबिक, "मैं शुरुआत में तो कुछ दिन पहले अपनी बेटियों के दाखिले के लिए यहां आई थी लेकिन जब मैं घर लौटी तो मैंने अपने पति से कहा कि मुझे खुद के स्कूल न जाने का कितना अफसोस है।"

अस्मा ने बताया, "उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे भी अपना नाम लिखवा लेना चाहिए था. मैं भाग्यशाली हूं, ज्यादातर पुरुष ऐसा नहीं करते।"

अस्मा दिसम्बर, 2010 में पहली बार अपनी दोनों बेटियों के साथ बुर्का पहनकर कक्षा में गई थीं।

वह कहती हैं, "मैं कभी भी स्कूल न जा पाने और अब अपने बच्चों की स्कूल का काम कराने में मदद न कर पाने की वजह से खुद को मूर्ख महसूस करती थी इसलिए मैंने उनके साथ स्कूल जाने का निर्णय लिया।"

अस्मा ने बताया कि स्कूल के ही एक शिक्षक एम.एफ अब्बास ने उन्हें दाखिला लेने के लिए प्रोत्साहित किया था।

अब्बास कहते हैं कि अस्मा अपनी बच्चियों को स्कूल से घर ले जाने के लिए जल्दी ही पहुंच जाती थी और कक्षा में पीछे जाकर बैठ जाती थी। वह वहां जो कुछ पढ़ाया जाता उसे बहुत ध्यान से सुनती थी, तब उन्होंने उसे भी दाखिला लेने का सुझाव दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+