आदर्श सोसायटी की इमारत को 3 माह में ढहाएं : मंत्रालय (लीड-2)
नई दिल्ली/मुम्बई, 16 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने रविवार को आदेश दिया कि घोटालों से घिरी मुम्बई की आदर्श हाउसिंग सोसायटी की इमारत को तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) नियमों के उल्लंघन की वजह से तीन महीने के भीतर ढहा दिया जाए। इस बीच सोसायटी ने कहा है कि इस आदेश को अदालत में चुनौती दी जाएगी।
पर्यावरण मंत्रालय ने अपने 29 पृष्ठों के आदेश में कहा कि मुम्बई के कोलाबा क्षेत्र के ब्लॉक-6, बैकवे रिक्लेमेशन एरिया में बना 31 मंजिला अवैध ढांचा पूरी तरह ढहा दिया जाना चाहिए और इस इलाके को इसकी मौलिक स्थिति में लाया जाना चाहिए।
आदेश में कहा गया है, "यह आदेश प्राप्त करने के तीन महीने के भीतर इसका पालन न होने की सूरत में मंत्रालय इस निर्देश को लागू करने और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 की धारा 15 के तहत कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा।"
मुम्बई के कोलाबा में यह 31 मंजिली इमारत मौलिक रूप से छह मंजिली बनाई जानी थी। इस इमारत में कारगिल युद्ध के जांबाजों और उनके परिजनों को आवास दिए जाने थे लेकिन बाद में इसमें अतिरिक्त मंजिलें जोड़कर इसे 31 मंजिला बना दिया गया।
सीआरजेड के तहत तटीय इलाके में किसी भी निर्माण से पहले अनुमति लेनी होती है। मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा है कि आदर्श सोसायटी ने सीआरजेड अधिसूचना 1991 के तहत आवश्यक पूर्वानुमति नहीं ली थी।
आदेश के मुताबिक मंत्रालय ने तीन विकल्पों पर विचार किया-पूरे ढांचे को गिरा दिया जाए, क्योंकि वह अवैध है, ढांचे के अतिरिक्त हिस्सों को ढहा दिया जाए तथा सरकार को सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए इस इमारत पर कब्जा करने को कहा जाए।
आदेश में कहा गया है कि बाद वाले दोनों विकल्प नामंजूर कर दिए गए क्योंकि ऐसा किया जाना तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) अधिसूचना, 1991 का उल्लंघन होता।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने नई दिल्ली में कहा, "इन तथ्यों, परिस्थितियों, विचार-विमर्श, विचारों, दलीलों और आदर्श कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के दस्तावेज के विश्लेषणों पर गौर करते हुए मैंने इस इमारत को ढहाने का विकल्प चुना है।"
इससे पहले गत नवम्बर में सोसायटी को नोटिस जारी कर पूछा गया था कि क्यों न इमारत में अवैध तौर पर बनाई गई मंजिलें ढहा दी जाएं।
आदर्श सोसायटी के वकील सतीश मनेशिंदे ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय ने यह फैसला जल्दबाजी में लिया है और वह इसके खिलाफ अदालत जाएंगे।
समाचार चैनल एनडीटीवी से मनेशिंदे ने कहा, "आदेश का जो तात्पर्य है वह अनुचित है और वे इसे अदालत में चुनौती देंगे।"
उल्लेखनीय है कि इस मामले में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को नौकरशाहों और राजनीतिज्ञों के बीच साठगांठ के आरोपों के कारण पद छोड़ना पड़ा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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