नागरिक सहायता में सेना की तैनाती से थलसेनाध्यक्ष असहमत
जनरल सिंह ने कहा कि सेना राष्ट्र द्वारा दिए गए कर्तव्य का ही एक हिस्सा है। उन्होंने कहा, "सेना अपनी भूमिका वहां अदा करती है, जब ऐसा लगता है कि आतंरिक हालात को संभालने और आपातकालीन राहत मुहैया कराने में राज्य की मदद करनी चाहिए।"
उन्होंने कहा, "सेना का इस्तेमाल केवल तब किया जाना चाहिए जब किसी भी राज्य में हालात पुलिस बलों के काबू से बाहर हो जाएं।"
आकाशवाणी पर वरिष्ठ पत्रकार कल्याणी शंकर के साथ साक्षात्कार में सिंह ने कहा, "इस समय एक ऐसी प्रवृत्ति विकसित हुई है जिसमें पुलिस बलों का पूरी तरह बिना इस्तेमाल किए तुरंत सेना को बुला लिया जाता है जबकि वहां कानून एवं व्यवस्था संभालने वाली अन्य मशीनरियां भी मौजूद रहती हैं।"
उन्होंने कहा, "किसी आपात स्थिति में सेना को तुरंत बुलाने से राज्य की इच्छा शक्ति दिखाई नहीं देती है। आप जानते हैं इसका मतलब यह होगा कि राज्य अपनी जिम्मेदारियों को सेना पर थोप रहा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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