34,000 साल पुराने बैक्टीरिया की खोज
नमक के ये क्रिस्टल कैलीफोर्निया की डेथ वैली में दबे हुए थे।
इन प्राचीन बैक्टीरिया को खोजने वाले वैज्ञानिक ब्रियान शुबर्ट ने 'क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर' के हवाले से कहा है, "मेरे लिए यह वास्तव में बहुत बड़ा आश्चर्यजनक था।" नमक के क्रिस्टल प्राकृतिक रूप से और बहुत तेजी से बनते हैं, इस दौरान उनके सम्पर्क में जो भी तैरती हुई वस्तु या जीवित जीव आता है, वह उनमें छोटे-छोटे बुलबुलों में संरक्षित हो जाता है।
बिंगहेमटन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व शुबर्ट के सलाहकार टिम लोवेंस्टीन कहते हैं कि ये बैक्टीरिया नमक के अंदर पूरी तरह से बंद थे। उन्होंने कहा कि एक नए शोध में पता चला है कि खारे पानी की झीलों में नमक के क्रिस्टल बनने की प्रक्रिया जारी रहती है।
'जियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ अमेरिका' की पत्रिका 'जीएसए टुडे' ने शुबर्ट के इस शोध को प्रकाशित किया है।
शुबर्ट का कहना है कि ये बैक्टीरिया धरती पर अब भी पाए जाते हैं और खारे पानी में रहते हैं लेकिन वे अक्रिय अवस्था में हैं।
शुबर्ट ने 'अवर एमेजिंग प्लेनेट' को बताया कि ये बैक्टीरिया जीवित हैं लेकिन वे तैरने के लिए किसी भी तरह की ऊर्जा का इस्तेमाल नहीं करते और न ही प्रजनन करते हैं। उन्होंने कहा कि ये बैक्टीरिया खुद को जीवित रखने के अलावा और कुछ नहीं करते।
शुबर्ट ने नमक के 900 क्रिस्टल नमूने जांचे थे लेकिन उन्हें केवल पांच में ही जीवित बैक्टीरिया मिले। शुबर्ट के मुताबिक ये बैक्टीरिया 34,000 साल पुराने हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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