पहली रक्षा उत्पादन नीति जारी, स्वदेशी पर जोर
रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पहली नीति में आत्मनिर्भता प्राप्त करने के लिए एक ठोस औद्योगिक आधार बनाने पर जोर दिया गया है। इसमें रक्षा उपकरणों के स्वदेशी डिजाइन, विकास और विनिर्माण पर भी जोर दिया गया है।
एंटनी ने वर्ष 2011 की रक्षा खरीद नीति और रक्षा खरीद पद्धति भी जारी की है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता को काफी कम करना है।
उन्होंने कहा कि यह नीति अगले दस वर्षो में जरूरी उपकरणों की दीर्घावधि जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होगी।
एंटनी ने कहा, "वर्तमान में भारतीय सेना अपनी जरूरत के साजो-सामान के 70 प्रतिशत हिस्से की खरीददारी विदेशों से करती है। एक बार पूरी तरह नई रक्षा उत्पादन नीति के तहत काम शुरू हो जाने से यह स्थिति काफी हद तक बदल जाएगी।"
उन्होंने कहा कि नई नीति के तहत प्रक्रियाएं सरल होंगी, उत्पादन तय अवधि के अंदर होगा और रक्षा उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। स्वेदेशी निर्माण पर जोर देने के अलावा यह नीति सुनिश्चित करेगी कि जल, थल या वायुसेना के लिए कोई भी अत्यावश्यक साजो-सामान तभी विदेशों से खरीदा जाए जब या तो स्वदेशी तरीके से बनाने की तकनीक उपलब्ध न हो या फिर तय समय-सीमा के अंदर उसका निर्माण संभव न हो।
एंटनी ने संवाददाताओं से कहा, "नई नीति के अंतर्गत नागरिक उड्डयन और आंतरिक सुरक्षा उत्पादनों को भी लाया गया है, जिसकी मांग काफी दिनों से की जा रही थी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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