मप्र में लगान माफ, वसूली थमी (लीड-1)
भोपाल, 14 जनवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में किसानों की आत्महत्या पर प्रदेश सरकार अब गंभीर नजर आने लगी है। देर से ही सही, सरकार ने किसानों को राहत देने का मन बना लिया है। यही वजह है कि वह लगान माफ करने और कर्ज वसूली स्थगित करने जा रही है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संकट की इस घटी में प्रदेश सरकार किसानों के साथ है। किसानों को राहत देने के लिए 500 करोड़ रुपये की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा लगान माफ करने के साथ कर्ज वसूली भी स्थगित कर दी जाएगी। साथ ही यह घोषणा भी की कि किसानों की जमीन नीलाम नहीं होगी।
किसानों का हाल और फसल बर्बादी की हकीकत जानने के लिए मुख्यमंत्री चौहान ने शुक्रवार को नरसिंहपुर जिले का दौरा किया।
दौरे के बाद भोपाल लौटकर चौहान ने पत्रकारों से कहा कि किसानों को फौरी राहत पहुंचाने के लिए सरकार ने 500 करोड़ रुपये की विशेष व्यवस्था की है। सर्वेक्षण का कार्य तेजी से चल रहा है और जल्द ही राहत राशि का वितरण शुरू हो जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को राहत देने के मकसद से लगान को माफ किया जाएगा और कर्ज के रकम की वसूली स्थगित कर दी जाएगी।
चौहान ने कहा, "फसलों पर प्रकृति की मार इस बार जैसी पड़ी है, वैसी पहले कभी नहीं देखी गई। दलहन बुरी तरह चौपट हो गई है। किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने हर संभव कदम उठाए हैं। संभाग आयुक्तों से लेकर जिलाधिकारियों तक को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे सर्वेक्षण व राहत देने में उदारता बरतें। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि 50 फीसदी नुकसान को शत प्रतिशत नुकसान मानकर राहत दें।"
चौहान के अनुसार किसानों को राहत देने के लिए प्रदेश सरकार ने राजस्व नियमों में भी बदलाव किया है। अब अरहर के नुकसान पर 11000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से राहत दी जाएगी तथा अन्य फसलों पर 8500 रुपये प्रति हेक्टेयर एवं फलों की खेती करने वाले किसानों को 7000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से राहत दी जाएगी।
किसानों पर बढ़ते कर्ज और सूदखोरों द्वारा मनमानी वसूली किए जाने के मामलों में भी सरकार ने गंभीर रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि गैर पंजीकृत सूदखोर किसानों से कर्ज की वसूली नहीं कर सकेंगे। इतना ही नहीं, पंजीकृत सूदखोरों को भी सहकारी बैंकों की तरह ब्याज दर पर राशि लेने का अधिकार रहेगा।
चौहान ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर किसानों को राहत पैकेज देने की मांग की है, मगर उस पैकेज का इंतजार किए बगैर प्रदेश सरकार ने अपनी ओर से आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पिछले एक माह में आठ किसान फसल बर्बाद होने और कर्ज के बोझ के चलते आत्महत्या कर चुके हैं तथा पांच ने आत्महत्या का प्रयास किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications