गणराज्य अपने बच्चों को नहीं मार सकता : न्यायालय (लीड-1)
न्यायाधीश अफताब आलम और न्यायाधीश आर. एम. लोढ़ा की खंडपीठ ने कहा, " इस मामले में केंद्र और आंध्र प्रदेश सरकार को नोटिस जारी की जाएगी। हमें उम्मीद है कि अच्छी प्रतिक्रिया मिलेगी। वे सभी सवालों का जवाब देंगे। एक गणराज्य अपने बच्चों को मारने का कलंक बर्दाश्त नहीं कर सकता।"
न्यायालय ने स्वामी अग्निवेश और हेमचंद्र पाण्डे की विधवा बिनीता पाण्डे की एक याचिका पर केंद्र और आंध्र प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में कहा गया था कि अनुच्छेद 14 और 21 के तहत संविधान प्रदत्त मूल अधिकारों का हनन करते हुए पुलिस ने आजाद और पाण्डे की हत्या कर दी।
अदालत को बताया गया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच और संगठन 'क्व ोर्डिनेशन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स ऑर्गनाइजेशन'(सीडीआरओ) द्वारा मुहैया कराए गए सबूतों से स्पष्ट है कि आंध्र पुलिस ने फर्जी तरीके से मुठभेड़ को अंजाम दिया था।
जब आजाद को पाण्डे के साथ गिरफ्तार किया गया था उस समय वह स्वामी अग्निवेश द्वारा लिखित पत्र नक्सली नेताओं के लिए ले जा रहे थे। जिसमें सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच तीन दिन के भीतर हिंसा खत्म करने और सरकार से शांति वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया था।
सरकार यह स्वीकार कर चुकी है कि दो जुलाई को आंध्र प्रदेश के अदिलाबाद जिले में एक मुठभेड़ में आजाद की मौत हो गई।
नक्सलियों ने हालांकि दावा किया है कि महाराष्ट्र के नागपुर में एक फर्जी मुठभेड़ में आजाद की हत्या कर दी गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications