शास्त्रीय संगीत के प्रचार की आवश्यकता है : हुसैन

मुम्बई, 14 जनवरी (आईएएनएस)। प्रख्यात शास्त्रीय संगीतज्ञ उस्ताद विलायत हुसैन के बेटे व शास्त्रीय गायक, सितार वादक हिदायत हुसैन कहते हैं कि शास्त्रीय संगीत विस्तृत व अर्थपूर्ण है और हमारी संस्कृति को शुद्ध अवस्था में प्रस्तुत करता है जबकि इसका प्रचार उस तरह से नहीं हो रहा है जैसे होना चाहिए।

हुसैन ने आईएएनएस से साक्षात्कार में कहा, "भारतीय शास्त्रीय संगीत व सितार जैसे वाद्य यंत्रों के प्रचार की आवश्यकता है। भारत सिर्फ बॉलीवुड और क्रिकेट का प्रचार बढ़ चढ़कर कर रहा है। मुझे भी ये दोनों पसंद है लेकिन मैं यह महसूस करता हूं कि भारत इन दोनों के अलावा भी बहुत कुछ दे सकता है।"

उन्होंने कहा कि यह देश विरासत और संस्कृति से भरा हुआ है और क्रिकेट, बॉलीवुड के अलावा और भी बहुत सी चीजें हैं, जिन्हें प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है। बहुत से लोग शास्त्रीय संगीत पसंद करते हैं। हुसैन ने हाल ही में अपनी एलबम 'सांवरिया' जारी की है।

उन्होंने कहा, "मुझे ऐसा लगता है कि लोगों की अब भी शास्त्रीय संगीत में रुचि है। जाहिर है कि यदि हम 'मुन्नी बदनाम हुई' और 'शीला की जवानी' से इसकी तुलना करें तो शास्त्रीय संगीत की लोकप्रियता कम होगी लेकिन व्यक्तिगत रूप से लोग अब भी इसमें रुचि रखते हैं।"

पैंतीस वर्षीय हुसैन अब न्यूयार्क में बस गए हैं। जब वह मात्र चार साल के थे तभी उन्होंने अपने पिता से भारतीय शास्त्रीय गायन का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था। वह 14 साल की उम्र तक अपने पिता से प्रशिक्षण लेते रहे।

हुसैन ने ख्याल गायकी सहित अन्य प्रकार के शास्त्रीय गायन का प्रशिक्षण लिया है। उन्होंने संगीत के कई प्रतिष्ठित समारोहों में हिस्सा लेकर दुनियाभर में प्रस्तुतियां दी हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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