मप्र में आत्महत्या करने वाले सभी किसान : किसान संघ
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से सम्बद्ध भारतीय किसान संघ के प्रदेशाध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ने संवाददाताओ से कहा कि प्रदेश में अब तक 10 किसान जान दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार व प्रशासन चाहे जो तर्क दे मगर किसानों ने नुकसान के चलते आत्महत्या की है। खेती फायदे नहीं घाटे का धंधा बनता जा रहा है, किसानों को लागत के मुताबिक मूल्य नहीं मिलता और हर तीन साल में आने वाली प्राकृतिक आपदा उसे तोड़ देती है।
प्रदेश के कृषि मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया द्वारा फसल की बर्बादी को पुराने पापों का फल बताने पर भी किसान संघ ने नाराजगी जताई है। संघ ने कुसमारिया का पुतला दहन कर उनके बयान की निंदा करने का निर्णय लिया है। शर्मा ने कहा कि कृषि मंत्री का बयान दुखदायी है।
उन्होंने आगे कहा कि किसानों की आत्महत्या की एक नहीं कई वजहें हैं। किसान को लागत का मूल्य नहीं मिल रहा है, वहीं उसे उपेक्षा, दंड व अपमान का सामना करना पड़ता है, जिससे अब वह परास्त हो चला है और यही कारण है कि आत्महत्या जैसे कदम उठा रहा है।
किसान संघ ने किसानों से आत्महत्या जैसे कदम न उठाने की अपील की है। साथ ही तय किया है कि जिन किसानों ने आत्महत्या की है उनके परिवारों को वह गोद लेगा और उन्हें सरकार से उचित मुआवजा दिलाने की लड़ाई लड़ेगा।
उन्होंने आंकड़ों के आधार पर बताया कि प्रदेश में बीते नौ वर्षो में 12 हजार किसान जान दे चुके हैं। इसका मतलब है कि 1200 से ज्यादा किसान हर वर्ष आत्महत्या कर रहे हैं। किसानों की समस्याओं को लेकर दिसम्बर 2010 में हजारों किसान भोपाल की सड़कों पर उतरे थे, वह किसानों का गुस्सा था, जिसे सरकार समझ नहीं पाई। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी सरकार उनकी 184 मांगों को पूरा करने के लिए सिर्फ कोशिशें कर रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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