कनाट प्लेस गोलीबारी मामले में गृह मंत्रालय से जवाब तलब
न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर ने कहा कि पुलिस के सहायक आयुक्त (एसीपी) राठी को पदावनत कर निरीक्षक बनाया गया था। पदावनति मामले पर केंद्रीय प्रशासन न्यायाधिकरण (सीएटी) ने हालांकि यथास्थति बनाए रखने का आदेश दिया था।
अदालत ने कहा, "यह अदालत इस पर अफसोस जाहिर करती है कि वारदात के समय एसीपी के पद पर तैनात पुलिस अधिकारी, जिसे इस अदालत ने 18 सितम्बर, 2009 को दोषी करार दिया था, फिर भी उसकी सेवा बरकरार है।"
ज्ञात हो कि इस मामले के अन्य नौ पुलिस अधिकारियों को दोषी करार दिए जाने के बाद बर्खास्त कर दिया गया था।
अदालत ने कहा, "अदालत को जानकारी मिली है कि सेवा के नियम एवं शर्तो के अनुसार दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की बर्खास्तगी तभी हो सकती है, जब आरोपी पुलिस अधिकारी इस सम्बंध में अपील दायर करेगा।"
अदालत ने इस नियम पर आश्चर्य जताया कि हत्या का दोषी करार दिए गए अधिकारी की सेवा भी बनी रहेगी।
न्यायमूर्ति मुरलीधर ने कहा, "केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव सेवा शर्तो की जांच करेंगे और अदालत को वस्तुस्थित से अवगत कराएंगे कि यह अनोखी शर्त सिर्फ दिल्ली पुलिस पर लागू है या समूचे देश में।"
अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से कहा कि वह चार हफ्तों के भीतर कम से कम निदेशक श्रेणी के वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से रिपोर्ट पेश करे।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में राठी को छोड़कर जिन पुलिस अधिकारियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है, उनमें निरीक्षक अनिल कुमार, उप निरीक्षक अशोक राणा, हेड कांस्टेबल शिव कुमार, तेजपाल सिंह, महावीर सिंह तथा कांस्टेबल सुमेर सिंह, सुभाष चंद, सुनील कुमार एवं कोठारी राम शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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