वाइब्रेंट गुजरात में 462 अरब डॉलर के 8,000 एमओयू पर हस्ताक्षर (राउंडअप)
उन्होंने कहा कि सम्मेलन में 54 फीसदी एमओयू पर छोटी मझोली कम्पनियों (एसएमई) ने हस्ताक्षर किए।
सम्मेलन में जितनी राशि के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए वह भारत के पास मौजूद 300 अरब डॉलर के विदेशी पूंजी कोष से अधिक है।
इससे पहले 2009 के सम्मेलन में 12,00,000 करोड़ रुपये (लगभग 243 अरब डॉलर) मूल्य के 4,000 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे।
मोदी ने कहा कि यद्यपि अभी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि किसी कारोबारी क्षेत्र में कितने मूल्य के एमओयू पर हस्ताक्षर हुए, फिर भी सर्वाधिक एमओयू ढांचागत क्षेत्र से हैं।
अधिकारियों के मुताबिक शहरी विकास और ढांचागत क्षेत्र में 2,26,000 करोड़ रुपये मूल्य के 655 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। जल संसाधन और जल संरक्षण क्षेत्र में 33,796.90 करोड़ रुपये मूल्य के 33 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
राज्य के उद्योग सचिव एम. साहू के मुताबिक 101 देशों के 1,400 विदेशी प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में हिस्सा लिया। सम्मेलन में 479 सांस्थानिक और ज्ञान साझा करने के समझौते हुए। सामाजिक क्षेत्र में 470 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए, जबकि राज्य से बाहर 30 परियोजनाओं में निवेश के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। सम्मेलन से गुजराती कम्पनियों को अंतर्राष्ट्रीय बनने में मदद मिली है।
समापन व्यक्तव्य में मोदी ने कहा कि वे इस सम्मेलन को राज्य के युवा वर्ग और गुजरात की मांओं को समर्पित करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्य में समेकित विकास के लिए मंगलम अभियान शुरू किया है और राज्य की महिलाओं को विकास का साझीदार बनाने के लिए पिछले दो सालों में दो लाख सखी मंडलों का गठन किया।
उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट जगत की सामाजिक जिम्मेदारी के तहत देश भर की 34 कम्पनियों ने 20,000 करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।
उन्होंने कहा कि वह गुजरात को सिर्फ देश के विकास का इंजन ही नहीं बनाना चाहते हैं, बल्कि देश का एक शक्तिशाली राज्य भी बनाना चाहते हैं, जो अपने लिए और देश के हित के लिए खड़ा हो सके।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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