प्रधान न्यायाधीश से माफी मांगने को राजी नहीं प्रशांत भूषण
भूषण ने कपाडिया को उस वाकए का जिक्र करते हुए भ्रष्ट कहा था, जब वन खंडपीठ के सदस्य के तौर पर खनन कम्पनी वेदांता के एक मामले पर फैसला दे रहे थे।
अदालत ने सुझाव देते हुए कहा कि भूषण को माफीनामे के साथ यह स्पष्टीकरण देना चाहिए कि उन्होंने खंडपीठ के सदस्य के तौर पर खनन कम्पनी वेदांता के एक मामले पर फैसला दे रहे कपाडिया को किस संदर्भ में भ्रष्ट कहा था।
इस पर भूषण ने अदालत से कहा कि उन्हें जो कहना था, वह गुरुवार को पेश अपने दो पृष्ठों के बयान में कह चुके हैं और उन्हें आगे कुछ नहीं कहना है।
भूषण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने कहा कि उनके मुवक्किल के बयान का यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि कपाडिया को कोई आर्थिक लाभ मिला था। उन्होंने अदालत से कहा कि वह भूषण के स्पष्टीकरण को उसी रूप में स्वीकार करे जिस स्वरूप में वह है और माफीनामे की बात पर अड़ी न रहे।
ज्ञात हो कि कपाडिया तीन न्यायाधीशों वाली उस खंडपीठ में शामिल थे जो वेदांता के मामले की सुनवाई कर रही थी। उस समय कपाडिया प्रधान न्यायाधीश नहीं बने थे। 'तहलका' पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में भूषण ने उस खंडपीठ में कपाडिया की मौजूदगी को 'भ्रष्ट' बताया था।
उन्होंने कहा था कि न्यायमूर्ति कपाडिया को खुद को इससे अलग कर लेना चाहिए था क्योंकि उन्होंने वेदांता में निवेश किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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