कर्नाटक में महंगाई ने छीनी मकर संक्रांति की रौनक
बेंगलुरू, 13 जनवरी (आईएएनएस)। कर्नाटक में नई फसलों के मौसम की शुरुआत के अवसर पर मनाया जाने वाले त्योहार मकर संक्रांति को लेकर महंगाई के कारण लोगों में कोई खास उत्साह नहीं देखा जा रहा है।
राजनीति दल एक-दूसरे के शासनकाल के घोटालों के खुलासे करने में इतने व्यस्त हैं और किसी को बढ़ती कीमतों के बारे में आवाज उठाने की सुध नहीं है।
अगले दो दिनों के दौरान राज्य में कीमतों में 25 फीसदी बढ़ोतरी हो सकती है। अभी तक यह साफ नहीं हो पा रहा है कि फलों और सब्जियों की कीमतों में इतनी तेजी से क्यों बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि कर्नाटक सब्जी उत्पादन के मामले में सातवें और फल उत्पादन में देश में आठवें पायदान पर है।
राज्य में सालाना फल उत्पादन तकरीबन 55 लाख टन और 67 लाख टन सब्जी उत्पादित होती है। ऐसा नहीं है कि केवल उपभोक्ता ही बढ़ी कीमतों के बारे में शिकायत कर रहे हैं बल्कि किसान भी कह रहे हैं कि उनके उत्पादन के वाजिब दाम नहीं मिल रहे हैं जबकि महंगाई आसमान छू रही है।
मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा पर बेंगलुरू में अपने संगे-सम्बंधियों के नाम भूमि आवंटित करने के लेकर आरोप हैं लेकिन वह लगातार बढ़ रही कीमतों के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
राज्य में प्याज की कीमत 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। इसे लेकर मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की है। उन्होंने महंगाई पर काबू पाने के लिए कदम उठाने को कहा है।
किसी भी कार्रवाई का बाजार में बढ़ रहीं कीमतों पर असर नहीं दिख रहा है। वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और अन्य स्थानों पर आयकर विभाग के अधिकारियों ने प्याज व्यापारियों के यहां छापे मारे हैं जबकि कर्नाटक में इस तरह का कोई कदम नहीं उठाया गया है।
कर्नाटक देश का दूसरा प्याज उत्पादक राज्य है लेकिन मानसूनी और बेमौसम बारिश की वजह से उत्पादन पर असर पड़ा है।
राज्य में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और जनता दल-सेक्युलर (जेडीएस) महंगाई को लेकर कोई आवाज नहीं उठा रहे हैं। वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भूमि घोटालों का खुलासा करने में लगे हुए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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