अमेरिका ने की अपनी लड़ाकू विमान कम्पनियों की वकालत (लीड-1)
वाशिंगटन, 12 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री गैरी लॉक ने अपने भारत दौरे से पहले अमेरिकी लड़ाकू विमान निर्माता कम्पनियों के लिए वकालत करते हुए कहा है कि वाशिंगटन, नई दिल्ली का एक इच्छुक और समर्थ रक्षा साझीदार है।
लॉक के नेतृत्व में छह से 11 फरवरी के बीच एक व्यापारिक शिष्टमंडल भारत दौरे पर जाएगा। उन्होंने भारतीय राजदूत मीरा शंकर से मंगलवार को कहा कि अमेरिका दोनों देशों की रणनीतिक साझीदारी के लिए उच्च रक्षा प्रौद्योगिकी की बिक्री को एक आधार मानता है।
भारतीय वायु सेना के 126 लड़ाकू विमानों के 10 अरब डॉलर के सौदे के लिए विभिन्न देशों की कम्पनियां बोली लगा रही हैं। इसमें दो अमेरिकी लड़ाकू विमान लॉकहीड मार्टिन का एफ-16 और बोइंग का एफ/ए-18 दौड़ में हैं। इस दौड़ में रूसी लड़ाकू विमान मिग-35, फ्रांसीसी दसॉल्ट रैफेल, स्वीडन का लड़ाकू विमान ग्रिफेन और यूरोपीय संघ का यूरोफाइटर टाइफून शामिल है।
मझोले बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान श्रेणी के 126 विमानों की खरीददारी की 2007 में शुरू हुई प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। भारतीय वायु सेना के प्रतिनिधि छह प्रतियोगी कम्पनियों के विमानों का मुआयना भी कर आए हैं।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि लॉक ने मीरा शंकर से मिलकर द्विपक्षीय व्यापार और इससे सम्बंधित मुद्दों पर बात की। लॉक की अगुवाई में प्रतिनिधि मंडल भारत में दिल्ली, मुम्बई और बेंगलुरू में रुकेगा।
अमेरिकी उच्च प्रौद्योगिकी वाले व्यापारिक दल में शामिल होने के लिए 70 से अधिक अमेरिकी कम्पनियों ने आवेदन किया है। ये कम्पनियां नागरिक-परमाणु व्यापार, रक्षा और सुरक्षा, नागरिक उड्डयन और सूचना-संचार प्रौद्योगिकी कारोबार से जुड़ी हैं।
अमेरिका से भारत को होने वाले निर्यात में 2010 के पहले 10 महीने में 15.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है और पूरे साल में इसके 19 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो अब तक का सर्वाधिक होगा।
भारत को अमेरिकी निर्यात में हुई वृद्धि में उन्नत प्रौद्योगिकी ने सर्वाधिक योगदान किया, जिसमें एयरोस्पेस, विशेषज्ञ सामग्री, सूचना-संचार प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रोनिक्स और लचीली निर्माण सामग्री शामिल हैं।
अमेरिका ने 2009 में भारत को 16.4 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जिसके 2010 में बढ़कर 19 अरब डॉलर तक होने का अनुमान है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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