जगन ने किया शक्ति प्रदर्शन, कांग्रेस को दी चेतावनी (राउंडअप)

कांग्रेस ने हालांकि आंध्र की किरण कुमार रेड्डी की सरकार पर संकट मंडराने की बात से इंकार किया है लेकिन जगन के साथ-साथ तेलंगाना के विधायकों व सांसदों के रुख ने उसे हलकान कर दिया है। पार्टी ने वस्तुस्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय विधि मंत्री व प्रदेश प्रभारी एम. वीरप्पा मोइली को हैदराबाद भेजा है।

दरअसल, कृष्णा नदी जल बंटवारे के बहाने जगन ने दिल्ली में जंतर-मंतर पर अनशन के जरिए अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। इस मौके पर उनके साथ कांग्रेस के 24 विधायक और दो सांसद मौजूद थे। तेलगु देशम पार्टी (तेदेपा) और प्रजा राज्यम पार्टी (पीआरपी) के कुछ विधायकों ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत किया।

जगन अपने हजारों समर्थकों के साथ विशेष रेलगाड़ी से मंगलवार सुबह नई दिल्ली पहुंचे और सीधे धरनास्थल पर जाकर अनशन पर बैठ गए।

जगन ने यहां पत्रकारों से कहा, "वर्तमान में मैं कांग्रेस पार्टी पर एहसान कर रहा हूं। यदि मेरे विधायक इस्तीफा देते हैं तो सरकार गिर जाएगी। वास्तव में मैं एक भद्र पुरुष हूं इसलिए मैं अपने विधायकों को इस्तीफा देने के लिए न कहकर कांग्रेस पार्टी पर एहसान कर रहा हूं।"

उन्होंने कहा, "यदि मैं सरकार को गिराना चाहता तो इसे बहुत पहले कर दिया होता।"

जगन से यह पूछे जाने पर कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी. श्रीनिवास ने उन्हें समर्थन देने वाले पार्टी के सांसदों और विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। इस पर उन्होंने कहा, "यह मेरी भद्रता ही है जिससे कि वहां सरकार बची हुई है।"

उन्होंने कहा, "यदि कांग्रेस पार्टी कार्रवाई करना चाहती है तो मेरे विधायकों का भी कहना है कि वे सरकार में मेरे कहने पर ही बने हुए हैं।"

जगन के समर्थन में दिल्ली पहुंची अभिनेत्री से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनीं जयासुधा ने कहा कि उनकी वफादारी कांग्रेस के पूर्व सांसद व उनके मार्गदर्शक स्वर्गीय मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के बटे जगनमोहन रेड्डी के साथ है।

जयासुधा ने कहा, "मैं कांग्रेस और सोनिया गांधी की इज्जत करती हूं लेकिन मैं वाईएसआर की समर्थक हूं।"

पार्टी नेतृत्व की अवज्ञा करते हुए राष्ट्रीय राजधानी में जगन के शक्ति प्रदर्शन में शामिल हुए 24 कांग्रेसी विधायकों में से एक जयासुधा कहती हैं कि उन्हें वाईएसआर ने ही राजनीति में आमंत्रित किया था।

उन्होंने कहा, "मैं एक फिल्म अभिनेत्री हूं और मुझे स्वर्गीय वाईएसआर ने राजनीति में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। स्वाभाविक है कि मैं जगनमोहन रेड्डी का भी साथ दूंगी।"

उन्होंने कहा, "मैं जगनमोहन रेड्डी के पीछे चलना चाहती हूं..वह आंध्र प्रदेश के लोगों के लिए, एक अच्छे काम के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।"

जगन के इस शक्ति प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस विधायकों के शामिल होने और तेलंगाना क्षेत्र के विधायकों के विरोध से हलकान कांग्रेस ने मोइली को राज्य की स्थिति का जायजा लेने हैदराबाद भेजा।

मोइली ने यहा पहुंचते ही मुख्यमंत्री एन. किरण कुमार रेड्डी से मुलाकात की। जगन द्वारा सरकार गिराने की खुली चुनौती देने और तेलंगाना क्षेत्र के विधायकों के विरोध के मद्देनजर राज्य में उभरे राजनीतिक हालातों पर उन्होंने रेड्डी से चर्चा की।

ज्ञात हो कि तेलंगाना क्षेत्र के विधायकों व सांसदों ने भी चेतावनी दी है कि संसद के आगामी सत्र में अलग तेलंगाना राज्य के मसले पर विधेयक नहीं लाया गया तो वे पार्टी के साथ-साथ अपने पदों से भी इस्तीफा दे देंगे।

कड़प्पा संसदीय सीट और कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले जगन ने अपने पिता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी के निधन के बाद मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी दावेदारी पेश की थी। राजशेखर रेड्डी का निधन दो सितम्बर 2009 को एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हो गया था।

कांग्रेस से इस्तीफा देते समय जगन ने कांग्रेस पर परिवार को तोड़ने का आरोप लगाया था।

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने ही जगन किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर दो दर्जन विधायकों के साथ विजयवाड़ा में 48 घंटे के उपवास पर बैठे थे। राज्य में हुई भारी बारिश की वजह से किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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