विवेकानंद की विचारधारा 100 साल बाद नेपाल पहुंची

सुदेशना सरकार

काठमांडू, 11 जनवरी (आईएएनएस)। भले ही स्वामी विवेकानंद अपने जीवनकाल में पड़ोसी देश नेपाल न पहुंच पाए हों, लेकिन आज उनकी विचारधारा यहां के निवासियों खासतौर पर युवकों में तेजी से फैल रही है। एक तरह से नेपाल के निवासियों को एक सूत्र में बांधने का माध्यम भी बन रही है। इसका प्रमाण है नेपाल की राजधानी काठमांडू में नवस्थापित स्वामी विवेकानंद वेदांता केंद्र।

स्वामी की 148वीं जयंती के अवसर पर यहां से बुधवार को इनके विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए एक अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। इस केंद्र की शुरुआत दो कमरों से की गई थी। इन्हें संस्था के अध्यक्ष होमलाल श्रेष्ठ ने दान में दिया था। यह संस्था अपने सदस्यों से इंटरनेट आदि के माध्यम से भी संपर्क में रहती है और स्वामी के विचारों का प्रचार-प्रसार करती है।

इसके अलावा स्वामी विवेकानंद के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए कोलकाता स्थित अद्वैत आश्रम द्वारा नेपाली भाषा में पुस्तक प्रकाशित किया जा रहा है। अद्वैत आश्रम, स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित रामाकृष्ण मिशन की प्रचार प्रसार की एक शाखा है।

गौरतलब है कि रामकृष्ण मिशन की शाखाएं नेपाल को छोड़कर पूरे विश्व भर में फैली हैं। इसका कारण नेपाल सरकार की नीतियां थीं, जिसके अंतर्गत यहां विदेशी गैर सरकारी संस्थाओं का प्रवेश वर्जित था। अब शायद स्वामी की 150वीं जयंती के अवसर पर रामकृष्ण केंद्र की स्थापना हो सके।

इस विषय में आईएएनएस को बताते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के नेपाल प्रमुख और केंद्र के सलाहकार डॉ जगदीश घोष ने बताया कि नेपाल में काफी लोग स्वामी के विचारों से प्रभावित हैं। नेपाल में 1980 में डांग जिले के स्वामी कृपामयानंद संस्था से जुड़े और आज वे टोरंटो में संस्था के प्रमुख हैं।

स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित नेपाल पुलिस के पुलिस उपाधीक्षक गोपाल भट्टराई ने कई किताबों और गीतों की रचना भी कर डाली है। इनके दो किताबों के प्रायोजक इन्हें सोशल नेटवर्किं ग साइट से मिले। अब भट्टराई स्वामी के विचारों के प्रचार-प्रसार में लगे हैं। इसके अलावा स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित होने वालों में व्यावसायी, नौकरीपेशा सभी हैं।

जन्म के समय स्वामी विवेकानंद का नाम नरेंद्र दत्त रखा गया था। विवेकानंद का नामकरण उनके गुरु रामकृष्ण ने किया। विवेकानंद के जीवन पर रामकृष्ण का सर्वाधिक प्रभाव पड़ा। अपने गुरु के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए स्वामी विवेकानंद ने 1897 में बैलूर मठ की स्थापना की। बैलूर मठ से ही रामकृष्ण मिशन का संचालन किया जाता है जो शैक्षणिक, चिकित्सा आदि सामाजिक कार्यो में भी सक्रिय है।

विवेकानंद ने अपने जीवनकाल में दो बार नेपाल जाने की योजना बनाई लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+