अगला चुनाव जीतने के लिए भ्रष्टाचार को हथियार बनाएगी भाजपा (लीड-1)
गुवाहाटी, 9 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक रविवार को इस संदेश के साथ खत्म हुई कि भ्रष्टाचार के मुद्दे को हथियार बनाकर वह अगले लोकसभा चुनाव में उतरेगी।
यही नहीं, कांग्रेसनीत केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) पर भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना हमला तेज करते हुए पार्टी ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के साथ-साथ राष्ट्रमंडल खेल घोटाले और आदर्श सोसाइटी घोटाले की जांच भी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की मांग की है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इस मौके पर पार्टी नेताओं को अपनी छवि सुधारने की नसीहत दी ताकि कोई उन पर ऊंगली न उठाए।
पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के अंतिम दिन अपने समापन सम्बोधन में आडवाणी ने कहा, "हमारे समक्ष सबसे बड़ी चुनौती अपनी छवि साफ-सुथरी रखने की है ताकि हम जनता के बीच उनका समर्थन मांगने जाएं तो कोई हम पर ऊंगली ने उठाए।"
उन्होंने कहा, "मैं कहना चाहूंगा कि वर्ष 2010 स्वतंत्र भारत के इतिहास का निर्णायक मोड़ साबित होगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम भ्रष्टाचार व घोटालों के मुद्दों पर खुद को केंद्रित करते हुए 2014 के चुनाव में जाएं और उसे जीतना लक्ष्य बनाएं।"
इससे पहले, पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के अंतिम दिन राजनीतिक मामलों पर जारी प्रस्ताव में कहा गया, "राष्ट्र के सामने मुंह बाए खड़े इन तीन मुख्य घोटालों के स्वरूप और पेचीदगी को ध्यान में रखते हुए भाजपा इनकी जांच जेपीसी से कराने की मांग कर रही है।"
प्रस्ताव में कहा गया है कि 2जी स्पेक्ट्रम, राष्ट्रमंडल खेल और आदर्श घोटाले में कार्यपालिका और विधायिका के अनेक पहलू जुड़े हैं। संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) जैसे संवैधानिक निकाय के लिए इन जटिलताओं में जाना संभव नहीं है। पीएसी मंत्रियों को नहीं बुला सकती। प्रधानमंत्री ने बहादुरी से पीएसी के सामने पेश होने की पेशकश की है लेकिन तत्पश्चात् पीएसी इसे संभव बनाने के रास्ते खोजती नजर आ रही है।
राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया है कि चूंकि जेपीसी उन सभी को बुलाकर पूछताछ कर सकती है वह चाहें कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों। ठीक इसी बात से कांग्रेस जेपीसी से डरी हुई है और इसलिए वह जेपीसी नहीं चाहती।
प्रस्ताव के मुताबिक, "देश में अत्यधिक हताशा और अविश्वास व्याप्त है। राजनीतिज्ञों पर से लोगों का भरोसा उठ गया है। राजनीतिक दलों से भी उन्हें कोई आशा नहीं है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मूक हैं इसलिए स्थिति में कोई सुधार नहीं है।"
इस प्रस्ताव के जरिए भाजपा ने भ्रष्टाचार से पूरी तरह से लड़ने का संकल्प करते हुए कहा कि वह लोगों के खोए भरोसे की वापसी के लिए इस प्रयास की धुरी बनेगी।
पार्टी ने बोफोर्स दलाली मामले पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर हमला तेज कर दिया।
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने पत्रकारों से कहा, "भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने निर्णय लिया है कि वह भ्रष्टाचार और घोटालों के मुद्दे को देश की जनता के बीच ले जाएगी और दोषियों को सजा दिलाने और करदाताओं का पैसा वापस वसूलने के लिए सभी कानूनी संस्थाओं की मदद लेगी।"
"वर्ष 2010 भ्रष्टाचार का साल था और 2011 उन पर परदा डालने का साल रहेगा।"
भाजपा नेताओं ने कहा कि 'कांग्रेस के प्रथम परिवार' (गांधी परिवार) को बोफोर्स मामले पर देश की जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है।
सीतारमण ने कहा, "निश्चित रूप से कांग्रेस के प्रथम परिवार को स्पष्टीकरण देने की जरूरत है।"
ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित एक होटल में आयोजित हो रही इस दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक में भाजपा के 300 से ज्यादा नेता शामिल हुए।
बैठक के पहले दिन पूर्वोत्तर के सम्बंध में प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें असम पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की बात कही गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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