राम जन्मभूमि का विभाजन स्वीकार नहीं : विहिप
रामनाथी (गोवा), 9 जनवरी (आईएएनएस)। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के शीर्ष न्यासी मंडल के समापन सत्र में रविवार को संगठन ने दो टूक कहा कि श्रीरामलला एवं उनका जन्मस्थान दोनों ही स्वयं में देवता हैं तथा इसी रूप में हिंदू समाज इस स्थान को पूजता रहा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पीठ ने देवता स्वरूप जन्मस्थान को विभाजित करने का जो निर्णय दिया है, वह हिंदू समाज को कतई स्वीकार नहीं है।
विहिप के अध्यक्ष अशोक सिंघल ने कहा, "हमारी मान्यता है कि अयोध्या में श्रीराम जन्मस्थान पर भव्य मंदिर बनाना न केवल हिंदू समाज, बल्कि भारतीय मुस्लिम समाज के सम्मान का विषय भी है। महात्मा गांधी जी ने भी कहा था कि जिस देश में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जैसे महापुरुष अवतरित हुए, उस देश पर हिंदुओं, मुसलमानों और पारसियों को भी गर्व होना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने राम जन्मभूमि स्थल का एक तिहाई भाग मुस्लिम समुदाय को देने का निर्णय दिया है, जबकि मुस्लिम धर्मशास्त्रों एवं मान्यताओं के अनुसार विवादित स्थल पर पढ़ी गई नमाज अल्लाह कुबूल नहीं करते। इसलिए एक स्वर्णिम अवसर मुस्लिम समाज के सामने उपस्थित हुआ है कि वह स्वेच्छा से अपने हिस्से का एक तिहाई भाग भी रामलला को समर्पित कर दे और साम्प्रदायिक मनमुटाव को दूर कर हिंदू समाज से मधुर सम्बंध बनाने का मार्ग प्रशस्त करे।
सिंघल ने कहा, "राम जन्मस्थान सहित अधिग्रहीत पूरे परिसर भव्य मंदिर तथा कथा-स्मृति केंद्र तराशी हुई उन्हीं शिलाओं से बनेगा जो अयोध्या कार्यशाला में विद्यमान हैं। विद्यमान स्वरूप की रक्षा करना समस्त भारतीयों का प्रथम राष्ट्रीय कर्तव्य है। इसलिए अयोध्या तीर्थ की सांस्कृतिक सीमा में किसी नई मस्जिद का निर्माण नहीं होगा।"
उन्होंने कहा, "न्यासी मंडल भारत सरकार से आग्रह करता है कि वह शपथपत्र के अपने वचन को पूरा करे और सोमनाथ मंदिर की तरह ही संसद में कानून बनाकर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए 135 गुणा 100 वर्गफीट भूखंड एवं इसके चारों ओर की अधिग्रहीत सम्पूर्ण 70 एकड़ भूमि हिंदू समाज को सौंपकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे।"
उल्लेखनीय है कि विहिप के शीर्ष न्यासी मंडल का तीन दिवसीय सम्मेलन यहां शुक्रवार को शुरू हुआ था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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