वायु सेना में शामिल होगा लड़ाकू विमान तेजस

बेंगलुरू 9 जनवरी (आईएएनएस)। भारत का स्वनिर्मित देसी और बहु-मारक क्षमता से लैस लड़ाकू विमान तेजस प्रारंभिक परिसंचालन मंजूरी (आईओसी) के लिए सोमवार को भारतीय वायु सेना में शामिल किया जाएगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केवल एक सीट वाला दुनिया का सबसे छोटा सैन्य विमान तेजस भारतीय बेड़े में शामिल किया जाएगा। इसे रूस निर्मित मिग-21 की जगह शामिल किया जाएगा।

एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर आईएएनएस को बताया कि रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी तेजस का सेवा प्रमाण पत्र भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के चीफ मार्शल पी. वी. नायक को प्रदान करेंगे। इससे लड़ाकू विमानों के पायलट अंतिम परिसंचालन मंजूरी मिलने तक इसे हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) के तौर पर उड़ा सकेंगे। इसे वर्ष 2012 तक देश के शक्तिशाली बेड़े में शामिल किया जाएगा।

एरोनॉटिकल डिफेंस एजेंसी (एडीए) और हिन्दुस्तान एरोनॉटिकल लिमिटेड(एचएएल) द्वारा निर्मित इस सुपरसोनिक लड़ाकू विमान को तैयार करने में भारी देरी की वजह से लागत ज्यादा बढ़ गई है।

लड़ाकू विमान के निर्माण में देरी की कई वजहें हैं। मसलन एक दशक पहले मई 1998 में भारत के दूसरे परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसकी लागत 5,778 करोड़ रुपये बढ़ गई। जबकि शुरू के 1980 के दशक में इसके निर्माण पर 3,300 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया था।

अधिकारी ने बताया, "विमानों को नियंत्रित करने, रफ्तार, इसके शस्त्रीकरण और बेड़े में शामिल करने के लिए इन लड़ाकू विमानों की सभी पहलुओं से जांच करने के लिए पायलट चार विमानों को उड़ाएंगे।"

लड़ाकू विमानों की निर्माण श्रृंखला के तहत मंजूरी लेने के लिए एचएएल ने आठ विमान तैयार किए हैं। साथ ही ऑर्डर मिलने के बाद 20 लड़ाकू विमान वायु सेना को सौंपे जाएंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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