प्रवासी भारतीय चिकित्सक भारत की मदद के लिए तैयार
नई दिल्ली, 9 जनवरी (आईएएनएस)। ब्रिटेन में बसे भारतीय मूल के एक प्रमुख चिकित्सक का कहना है कि दुनियाभर में भारतीय मूल के करीब तीन लाख चिकित्सक काम कर रहे हैं और वे सभी विभिन्न तरीकों से भारत सरकार की मदद करने के लिए तैयार हैं।
'ग्लोबल एसोसिएशन ऑफ फिजीशियंस ऑफ इंडियन ओरिजन' (जीएपीआईओ) के महासचिव रमेश मेहता ने कहा, "विदेशों में काम कर रहे चिकित्सक स्वयंसेवी कार्य, शोधकार्यों में सहयोग और चिकित्सा शिक्षा सहित विभिन्न कार्यो में योगदान देना चाहते हैं।"
मेहता ने कहा, "दुनिया में शायद ही ऐसा कोई देश होगा जहां भारतीय मूल के चिकित्सक काम न कर रहे हों। हम इन सब चिकित्सकों के प्रयासों को समन्वित करके उनकी अलग-अलग विशेषज्ञताओं और भारत की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यहां के लिए ज्यादा उपयोगी बना सकते हैं।"
मेहता प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में हिस्सा लेने दिल्ली आए हैं। इस सम्मेलन में दुनियाभर में बसने वाले भारतीय मूल के लोग शिरकत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के अंतर्गत भारतीय मूल के 40,000 से ज्यादा चिकित्सक काम कर रहे हैं।
मेहता ने कहा, "ऐसे करीब 10,000 चिकित्सक या तो सेवानिवृत्त हो चुके हैं या होने वाले हैं और करीब 15,000 ऐसे चिकित्सक जो प्रशिक्षण ले रहे हैं वे भारत में संभावनाएं तलाश रहे हैं। यहां प्रतिभाओं की वापसी की संभावना है।"
यहां संक्रमण और मधुमेह जैसी बीमारियों के लिए सस्ती दवाएं बनाने के लिए शोध की बड़ी संभावनाएं हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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