कृषि प्रौद्योगिकी सुरक्षित और सस्ती होनी चाहिए : विशेषज्ञ

चर्चा की शुरुआत करते हुए एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक अजय परिदा ने कहा, "कृषि उपज बढ़ाने के लिए प्रासंगिक, सस्ती और स्वीकार्य प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की जरूरत है।"

उन्होंने कहा, "आणविक प्रजनन और जैव प्रौद्योगिकी में हुई तरक्की से आज की कृषि और कुपोषण की समस्या का समाधान करने की सम्भावना है। पौधों की जैव प्रौद्योगिकी से जहां उत्पादन बढ़ाया जा सकता है वहीं यह पर्यावरण और उपभोक्ताओं के लिए भी लाभकारी हो सकती है।

राष्ट्रीय पोषण संस्थान के निदेशक बी. सेसिकिरण ने कहा कि जैव सुरक्षा के लिए जैवप्रौद्योगिकी वाली फसलों की पूरी जांच की जाती है, लेकिन वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ इस बारे में आम जनता को जागरूक नहीं कर सके हैं।

'फाउंडेशन ऑफ जेनेटिक रिसर्च' के निदेशक कृष्णा द्रोनामराजू ने कहा कि वर्ष 1961 के 'अमेरिकी फॉरेन असिस्टेंस एक्ट' में प्रस्तावित संशोधन पर यदि अमल होता है तो इसका भारत समेत अन्य विकासशील देशों पर असर पड़ता।

इस विधेयक में 2010 से 2014 तक अन्य देशों को खाद्य संकट के समय मदद करने की बात कही गई है।

द्रोणामराजू के मुताबिक इस विधेयक में विवादित बात यह है कि यह स्थानीय परिवेश के मुताबिक जैव प्रौद्योगिकी के विकास और जीन संवर्धित प्रौद्योगिकी का पक्षधर है।

इस विधेयक के पक्ष में अमेरिकी कम्पनी मोनसेंटो ने पैरवी की है। विधेयक का समर्थन गेट्स फाउंडेशन और अमेरिके के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भी किया है।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक के प्रभाव पर गहराई से अध्ययन करने की जरूरत है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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