प्रवासी भारतीयों को एकल कार्ड, मताधिकार जल्द : प्रधानमंत्री (राउंडअप)

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की संस्कृति और ज्ञान शक्ति को विश्वभर में फैलाने के लिए पांच अन्य देशों में सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

प्रधानमंत्री सिंह ने कहा, "हमने हाल ही में विदेशों में रह रहे भारतीयों के नागरिकता कार्ड और भारतवंशी कार्ड की समीक्षा की है। हमने इन दोनों का विलय करने का निर्णय लिया है।"

यह दोनों कार्ड ऐसे लोगों को जारी किए जाते हैं जो भारतीय मूल के तो हैं लेकिन उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं हैं। लेकिन इन दोनों कार्ड में शुल्क और प्रक्रियागत आधार पर कुछ अंतर हैं। भारतवंशी इन दोनों के विलय की मांग कर रहे थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अनिवासी भारतीयों के मताधिकार को विस्तृत बनाने के लिए जरूरी कानूनी बदलाव किए जाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा, "नए कानूनी प्रावधानों से उन्हें भारतीय चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेने का वैध अधिकार मिलेगा।"

उन्होंने विश्वास जताया कि इस कदम से वे भारतीय राजनीति में नई स्फूर्ति का संचार करेंगे।

प्रधानमंत्री ने 51 देशों के करीब 1,500 प्रतिनिधियों, राजनयिकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए यह बात कही। न्यूजीलैंड के गवर्नर जनरल आनंद सत्यानंद इस मौके पर मुख्य अतिथि थे।

अन्य वक्ताओं में प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री व्यालार रवि, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री बी. के. हांडिक और प्रवासी भारतीय मामलों के सचिव ए. दीदार सिंह शामिल थे।

उन्होंने कहा कि पिछला साल भारत के लिए बहुत व्यस्त रहा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्य देशों-चीन, फ्रासं, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के नेताओं ने भारत का दौरा किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत का तीव्र विकास अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लिए एक सकारात्मक संदेश है। विकास, चुनौतियों और विभिन्न वर्गो के बीच सहमति बनाने को लेकर हमारे अनुभव अद्वितीय हैं। जो भारत और विश्व के लिए बेहतर हैं हम उन चीजों का संवर्धन करना चाहते हैं।"

उन्होंने कहा, "मुझे यह कहते हुए बेहद खुशी है कि प्रवासी भारतीय मतदान करने के लिए अपने नाम दर्ज करा सकेंगे।"

सिंह ने कहा कि भारत अपनी विविधता और ज्ञान शक्ति को विश्वभर में प्रदर्शित करने के लिए पांच अन्य देशों में सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत में शास्त्रीय परंपराओं, विविधता और जीवंतता की समृद्धि सपूर्ण विश्व को आलोकित करती है।"

उन्होंने कहा, "सरकार ने अमेरिका, कनाडा, सऊदी अरब, फ्रांस और आस्ट्रेलिया में भारतीय संस्कृति केंद्रों की स्थापना का निर्णय लिया है।" उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रवासी भारतीय समुदाय इन केंद्रों को प्रोत्साहित करेगा।

उन्होंने कहा, "भारत की ज्ञान शक्ति हमारे बढ़ते वैश्विक आर्थिक प्रभाव का एक महत्वपूर्ण अवयव है।"

भारत की सांस्कृतिक विरासत को लेकर विश्वभर में जागरुकता पैदा करने के लिए भारतीय संस्कृतिक सम्बंध परिषद ने दुनियाभर में 24 संस्कृति केंद्र स्थापित किए हैं।

प्रवासी समारोह में सर सत्यानंद ने कहा कि पिछली कुछ सदियों में हजारों मील दूर जाकर बस गए भारतीय मूल के लोग अपनी जड़ों को कभी नहीं भुला सकते। "उन्हें भारतीय विरासतों पर गर्व है।"

उन्होंने कहा कि 1976 तक न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के लोगों की संख्या 6,300 थी लेकिन आज इनकी संख्या एक लाख से ज्यादा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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