आरुषि हत्याकांड में अंतिम रिपोर्ट सीबीआई के लिए 'नाकामी' : पूर्व निदेशक
नई दिल्ली, 8 जनवरी (आईएएनएस)। चर्चित आरुषि हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच बंद करने का फैसला करना देश की प्रमुख जांच एजेंसी के लिए 'नाकामी' और 'बड़ा झटका' दोनों है और इससे उसकी छवि धूमिल हो सकती है। जांच एजेंसी के पूर्व निदेशक ने यह बात कही।
सीबीआई के पूर्व निदेशक डी.आर. कार्तिकेयन ने आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा, "हत्या हुई। दो शव बरामद किए गए। आप हत्यारे की पहचान और उसे सजा नहीं दिला सकते? यह नाकामी है और एजेंसी के लिए एक झटका है।"
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी ने इस हत्याकांड की जांच देरी से शुरू की और इससे लगता है कि अपराधियों को सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का पर्याप्त समय मिल गया।
उन्होंने कहा, "पुलिस के पहुंचने से पहले अपराध वाले स्थान को साफ कर दिया गया था। ज्यादातर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई।"
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की जांच करने वाली विशेष जांच टीम के प्रमुख रहे कार्तिकेयन से यह पूछे जाने पर कि सीबीआई को इस हत्याकांड की जांच में और समय लेना चाहिए था।
इस पर उन्होंने कहा, "जब आप कुछ हासिल करने के बारे में आश्वस्त नहीं हैं तो जांच जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।"
ज्ञात हो कि गत 16 मई 2008 को संदिग्ध परिस्थितियों में आरुषि की हत्या उसके नोएडा स्थित घर में हुई। नौकर हेमराज (45) का शव अगले दिन छत पर मिला। पुलिस ने हत्या का शक पहले हेमराज पर जताया था।
इस हत्याकांड की ढाई साल जांच करने के बाद सीबीआई ने साक्ष्यों के अभाव में किसी को आरोपी बनाए बिना गत 29 दिसम्बर 2010 को विशेष न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की। न्यायालय 21 जनवरी को रिपोर्ट पर सुनवाई करेगा।
कार्तिकेयन ने कहा, "मैं सीबीआई की बाध्यता समझ सकता हूं। जांच एजेंसी ने कहा कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई। यदि आपके पास पर्याप्त साक्ष्य नहीं है तो आप क्या कर सकते हैं।"
सीबीआई ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में आरुषि की हत्या का शक उसके माता-पिता राजेश और नूपुर तलवार पर जताया है। जबकि उन्होंने सीबीआई पर आरोप लगाया कि वह जांच से पीछा छुड़ाने के लिए उन पर शक जता रही है। उन्होंने अवमानना का मामला दायर करने की चेतावनी दी है।
कार्तिकेयन ने कहा, "सीबीआई कई मामलों की जांच कर रही है। यह आवश्यक नहीं है कि वह प्रत्येक मामले में निष्कर्ष पर पहुंच जाए। इसके लिए आप जांच एजेंसी पर अवमानना का आरोप नहीं लगा सकते।"
सीबीआई पर राजनीतिक दबाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "यह सरकार का एक विभाग है। जांच एजेंसी को उसके अधीन काम करना है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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