स्पेक्ट्रम मामला : सिब्बल पर माकपा ने बोला हमला
पार्टी ने कहा कि दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल की सफाई पूरे मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की जरूरत को ही रेखांकित करती है।
पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "सिब्बल ने अजीब सफाई दी है..इससे जेपीसी की जरूरत फिर रेखांकित हुई है। केंद्रीय मंत्री नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) पर अप्रत्याशित हमला कर मौजूदा समय में चल रही जांच को कमजोर और आधिकारिक एजेंसियों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह पूर्णत: अस्वीकार्य है।"
माकपा ने कहा, "सिब्बल की दृष्टि में कैग ने 2008 के लिए 3जी की 2010 की कीमत लगाई है, जबकि उस समय ग्राहकों की संख्या और रुपये का मूल्य कुछ और था। इसी तर्क पर उन्होंने अजीब व्याख्या की है। उन्हें यह बताने में समस्या नजर आ रही है कि 2001 में तय मूल्य पर 2008 में लाइसेंस आवंटित किए गए, जब ग्राहकों की संख्या मात्र 40 लाख थी और इस समय ग्राहकों की संख्या 30 करोड़ है!"
पार्टी का कहना है, "मंत्री को पता होना चाहिए कि सिर्फ कैग ही नहीं, बल्कि भारतीय दूरसंचार नियामक प्रधिकरण (ट्राई) ने भी सुझाव दिया था कि 2जी स्पेक्ट्रम के मानदंड के लिए 3जी के मूल्यों का प्रयोग होना चाहिए था। ऐसा करने के लिए उसने तकनीकी कारण भी बताया था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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