बिनायक सेन पर मुकदमा चलाना अनुचित : अमर्त्य सेन
अर्थशास्त्री ने बिनायक सेन पर एक पुस्तक का लोकार्पण करने के बाद कहा कि देश का एक नागरिक होने के नाते मैं पूछना चाहता हूं कि बिनायक सेन पर अनुचित रूप से मुकदमा चलाने का फैसला क्या सही निर्णय था?
उन्होंने कश्मीरी अलगाववादियों के पक्ष में बोलने पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए आरोपित अरुं धति राय का भी समर्थन किया। राय के खिलाफ हालांकि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि अरुं धति राय पर आरोप है कि उनके बयान से देशभक्ति की भावना को ठेस पहुंची है। हमारा कर्तव्य सिर्फ देशभक्तिपूर्ण बयान देना ही नहीं है।
उन्होंने बिनायक सेन की आजीवन कारावास सजा के बारे में कहा कि पहला सवाल यह है कि क्या प्रमाण सही है? और यदि यह सही भी है तो सिर्फ पत्र को एक से दूसरे तक पहुंचाना देश के खिलाफ युद्ध छेड़ना कैसे हो सकता है। मैं एक पत्र को एक व्यक्ति से लेकर दूसरे को दे सकता हूं, बिना यह जाने कि इसमें क्या लिखा है। इससे मैं देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाला नहीं हो जाता हूं।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ की एक अदालत ने 24 दिसम्बर 2010 को देशद्रोह और नक्सलियों से सम्बंध रखने के आरोप में बिनायक सेन को आजीवन कारावास की सजा दी है।
उन्होंने कहा कि देश के विरुद्ध युद्ध छेड़ने का मतलब है हिंसा से राज्य को नुकसान पहुंचाना, जो कि डॉक्टर बिनायक सेन ने कभी नहीं किया।
उन्होंने कहा कि मैं भी ऐसा कह कर राज्य के खिलाफ युद्ध नहीं छेड़ रहा हूं।
उन्होंने उच्च न्यायालय से बिनायक सेन को न्याय मिलने की उम्मीद जताई।
उन्होंने कहा कि वह एक डॉक्टर हैं और इस पेशे से बहुत पैसे कमा सकते थे, लेकिन उन्होंने लोगों की सेवा करने का फैसला किया। यह सिर्फ छोटी अवधि का ठहराव है। वे जल्दी ही आम लोगों की सेवा में लौट आएंगे।
बिनायक सेन पेशे से एक डॉक्टर होने के साथ-साथ 'पीपुल्स युनियन फॉर सिविल लिबर्टी' के उपाध्यक्ष भी हैं। अमेरिकी संस्था ग्लोबल हेल्थ काउंसिल ने 2008 में मानवाधिकार और वैश्विक स्वास्थ्य में उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित भी किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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