देश के 20 हजार थाने आपस में जुड़ेंगे
देश भर के फिंगर प्रिंट विशेषज्ञों के दो दिवसीय अधिवेशन के पहले दिन त्रिपाठी ने कहा कि अपराधों की रोकथाम और अपराधियों पर काबू पाने में फिंगर प्रिंट अहम रोल निभाते हैं। इसके जरिए बड़े से बड़े मामलों को आसानी से सुलझाया जा सकता है। चाहे वह मामला आरुषि तलवार जैसा क्यों न हो।
उन्होंने आगे कहा है कि ब्यूरो ने क्राइम एण्ड क्रिमलन ट्रेकिंग नेटवर्क सिस्टम तैयार किया है, इसके लिए योजना आयोग (केंद्र सरकार) ने 2000 करोड़ रुपये भी मंजूर कर दिए है। इस पर अक्टूबर 2011 से अमल भी शुरु हो जाएगा। इस अभिनव प्रयोग के जरिए कश्मीर से कन्याकुमारी तक 14 हजार थाने व छह हजार पुलिस अधिकारियों कम कार्यालय आपस में जुड़ जाएंगे। इतना ही नहीं दुर्गम इलाकों को वी-सेट के जरिए जोड़ा जाएगा।
आगामी योजनाओं की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि थानों में प्राथमिकी दर्ज करने और रोजनामचा के लिए एक सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है, ऐसा होने पर पुलिस जवानों को लिखापढ़ी से मुक्ति मिलेगी और उनके समय का उपयोग सुरक्षा कार्यो में हो सकेगा।
इस मौके पर प्रदेश के गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो का क्राइम एण्ड क्रिमलन ट्रेकिंग नेटवर्क सिस्टम देश के लिए रोल मॉडल बनकर उभरा है। देश को अपराधों से मुक्ति के लिए मध्य प्रदेश की यह सफलता सराहनीय है। इस मौके पर पुलिस महानिदेशक एस.के. राउत भी मौजूद थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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