रचनात्मकता बढ़ाता है पुरस्कार : प्रधानमंत्री (लीड-1)
मुम्बई, 6 जनवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को कहा कि छात्रवृत्ति और पुरस्कार जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में व्यक्ति विशेष के योगदान को पहचान देने और ज्ञान के आधार को व्यापक करने के अलावा रचनात्मक लोगों को आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन से मुक्त करते हैं।
प्रतिष्ठित इनफोसिस साइंस फाउंडेशन एवार्ड वितरित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "छात्रवृत्ति का महत्व कितना है इसके लिए मेरा स्वयं का जीवन प्रमाण है। यदि मुझे छात्रवृत्ति नहीं मिली होती तो मैं अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाता।"
प्रधानमंत्री ने ज्ञान के क्षेत्र में व्यक्तिगत योगदान और अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करने वाले पुरस्कार विजेताओं की प्रशंसा की। उन्होंने विजेताओं के चयन के लिए एक विशिष्ट निर्णय समिति की नियुक्ति पर इनफोसिस की तारीफ की।
उन्होंने कहा कि भारतीयों को उनके काम के लिए विश्व स्तर पर पहचान मिली है। यहां तक कि नोबेल पुरस्कार भी मिला है, लेकिन सी.वी. रमन के बाद यहां काम करते हुए किसी भारतीय को नोबेल पुरस्कार नहीं मिला है।
उन्होंने कहा, "मैं इनफोसिस पुरस्कारों को लेकर खासकर प्रसन्न हूं क्योंकि यह पुरस्कार यहां रहते हुए विश्व स्तर का अनुसंधान का काम करने वाले भारतीयों को दिया जाता है।"
उन्होंने कहा, "वास्तव में अब यह कहा जा सकता है कि हम एक ज्ञान आधारित युग में रहते हैं।"
प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि आज की दुनिया में एक देश की ताकत का आकलन उसकी सेनाओं से नहीं बल्कि उसके सामूहिक ज्ञान, उत्पादकता, उद्यमियों की रचनात्मकता और अपने व्यावसायिक कार्य बल के प्रति समर्पण से होता है।
उन्होंने कहा कि सामंती प्रतिबंध और पूर्व लोकतांत्रिक संस्थाएं ज्ञान की प्राप्ति में अब सामाजिक अवरोध उत्पन्न नहीं कर सकतीं।
उन्होंने कहा कि अब देश में इनफोसिस जैसी कम्पनियां अपने कर्मचारियों को विदेशी कम्पनियों जैसी सुविधाएं दे रही हैं।
उन्होंने कहा, "लेकिन हमें देश भर में इस तरह की सुविधाओं की जरूरत है।"
प्रधानमंत्री ने पांच श्रेणियों गणितीय विज्ञान, शारीरिक विज्ञान, अभियांत्रिकी एवं कम्प्यूटर विज्ञान, जीवन और समाज विज्ञान में विजेताओं को पुरस्कार दिए। प्रधानमंत्री ने विजेताओं को स्वर्ण पदक, प्रमाण पत्र और कर मुक्त 50 लाख रुपये प्रदान किए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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