दिल्ली में बढ़ी बलात्कार और छेड़छाड़ की घटनाएं (राउंडअप)
गुप्ता ने दिल्ली पुलिस के सालाना संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा, "2010 में अपराध दर में कमी आई है, क्योंकि प्रति लाख आबादी में 301.49 आपराधिक मामल दर्ज किए गए, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 306.37 था।"
उन्होंने हालांकि कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में दर्ज शिकायतों की संख्या बढ़ी है।
उन्होंने कहा, "साल 2010 में आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) के तहत 48,161 मामले दर्ज किए गए जबकि 2009 में 47,069 मामले दर्ज हुए थे।" उन्होंने कहा कि शहर की आबादी की तुलना में अपराधों में वृद्धि कम हुई है।
गुप्ता ने स्वीकार किया कि 2010 में बालात्कार की घटनाएं बढ़ीं। पिछले वर्ष बालात्कार के कुल 489 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2009 में 459 मामले दर्ज हुए थे।
उन्होंेने कहा कि राजधानी में छेड़छाड़ की घटनाएं 2010 में बढ़कर 585 तक पहुंच गईं, जबकि 2009 में 528 मामले दर्ज हुए थे।
गुप्ता ने कहा, "इस वर्ष महिलाओं और बुजुर्गो की सुरक्षा पर हमारा अधिक ध्यान रहेगा।"
गुप्ता ने कहा कि 2010 में हत्या के मामलों में कमी आई है। 2010 में हत्या के 519 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2009 में 527 मामले दर्ज हुए थे। पिछले वर्ष हत्या के 78 प्रतिशत मामले सुलझाए गए।
उन्होंने कहा, "हम लोगों को विश्वास दिलाना चाहते हैं कि बचे हुए मामले भी सुलझा लिए जाएंगे।"
उन्होंने कहा, "2010 में जघन्य अपराधों में शामिल 78 प्रतिशत लोगों को हिरासत में लिया गया जो संतोषजनक है। कुल 357 अपराधियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था।"
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। इसी के तहत गश्त लगाने के लिए और अधिक महिला पुलिस अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है।
गुप्ता ने कहा, "तीन जिलों में तीन महिला उपायुक्त हैं और चार स्थानों पर महिला थाना प्रभारी (एसएचओ) हैं। हम उनकी संख्या और बढ़ाएंगे।"
पिछले साल राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं के साथ दुष्कृत्य की घटनाएं बढ़ने के बाद से उनकी सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पिछले साल पूर्वोत्तर की एक बीपीओकर्मी के साथ दुष्कृत्य के साथ इस तरह की अन्य घटनाएं भी सामने आई थीं।
गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसरों में महिलाओं को अधिक सुरक्षा मुहैया कराने के लिए मोरिस नगर थाने का नाम बदलकर नॉर्थ कैम्पस थाना किया जाएगा और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैम्पस के लिए भी एक पुलिस थाना शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि महिला कॉलेजों के बाहर महिला पुलिस अधिकारी वैनों में सवार होकर गश्त लगाएंगी। गुप्ता ने बताया कि सभी थानों में महिलाओं की मदद के लिए एक हेल्पडेस्क होगी, जहां महिला अधिकारी ही बैठेंगी।
गुप्ता ने कहा कि यात्री बसों में महिलाओं की सुरक्षा का ख्याल रखने के लिए अधिक महिला अधिकारियों को तैनात किया जाएगा। खासकर सुबह व शाम ऐसा किया जाएगा।
गुप्ता ने कहा कि सड़क पर बने लेन पर ही चलने वाले कड़े अनुशासन और यातायात नियमों से जुड़े अपराधों पर जुर्माने से राष्ट्रीय राजधानी में यातायात प्रबंधन में काफी बदलाव आ सकता है।
उन्होंने कहा, "दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान सड़कों के लेन प्रणाली और जुर्माने वाले यातायात प्रबंधन की दुनिया में काफी सराहना हुई थी। राष्ट्रीय राजधानी में जुर्माना और लेन प्रणाली से यातायात प्रबंधन को सुचारु किया जा सकता है।"
पुलिस की वर्ष 2011 तक दिल्ली में बेहतर यातायात के लिए सभी चौराहों पर कैमरे लगाने की योजना के तहत करीब 1,700 कैमरे लगाने की योजना है।
गुप्ता ने कहा, "हमने 15 कॉरिडोर का भी चुनाव किया है,जहां से बस सेवाओं का प्रबंधन प्रभावी हुआ है। इसमें मुख्य रिंग रोड और प्रमुख चौराहे शामिल हैं, जहां से लगातार गश्त की जा रही है।"
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार कड़ी पुलिस गश्त के कारण दुर्घटनाओं में नौ फीसदी की कमी आई है।
पुलिस आयुक्त ने कहा, "हमने बेहतर यातायात इंतजाम के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। साथ ही सोशल नेटवर्किं ग वेबसाइट फेसबुक और हेल्पलाइन जैसे अन्य माध्यमों के जरिए लोगों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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